नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) और नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे संशोधित Form-6 को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि अदालत ने Form-6 के किसी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखने की बात कही कि आखिर इस फॉर्म में बदलाव किसने किया। मामला SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। अदालत ने संबंधित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है।
Form-6 को लेकर क्या है विवाद?
Form-6 का इस्तेमाल पात्र व्यक्ति द्वारा मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। विवाद उस अतिरिक्त घोषणा से जुड़ा है, जिसे SIR के दौरान ऑनलाइन Form-6 के साथ जोड़ा गया था।
इस घोषणा में नए मतदाता से यह जानकारी मांगी गई थी कि वह स्वयं या उसके माता-पिता पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में शामिल या चिन्हित थे या नहीं। पहले इस्तेमाल किए जा रहे Form-6 में इस तरह की जानकारी नहीं मांगी जाती थी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा था?
26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी जानकारी में कहा गया था कि SIR के लिए Form-6 के साथ लगाया गया घोषणा-पत्र सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले में बरकरार रखा गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि सामान्य अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे।
हालांकि, सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अदालत ने किसी संशोधित Form-6 को मंजूरी नहीं दी थी। अब अदालत रिकॉर्ड के आधार पर यह देखना चाहती है कि बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
विवाद के बाद चुनाव आयोग ने क्या किया?
रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के फैसले के बाद उन राज्यों में Form-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया, जहां SIR पूरा हो चुका था। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के दौरान और सामान्य अवधि में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म को लेकर अलग-अलग नियम लागू होंगे।
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद Form-6 में किए गए बदलाव, उसकी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसले का रिकॉर्ड अदालत के सामने आने की उम्मीद है। इस मामले में आगे की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि अतिरिक्त घोषणा को जोड़ने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थी या नहीं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

