चंडीगढ़: पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के बड़े सड़क निर्माण और मरम्मत अभियान को बिटुमेन की कमी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी से झटका लगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में बिटुमेन की कीमत करीब दोगुनी होकर लगभग 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। पहले इसकी कीमत करीब 4,000 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल थी।
पंजाब सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर सड़कों के उन्नयन और मरम्मत का कार्यक्रम शुरू किया था। लोक निर्माण विभाग (PWD) और पंजाब मंडी बोर्ड के स्तर पर करीब 16,497 किलोमीटर सड़कों पर काम चल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें करीब 40 फीसदी यानी 16,454 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हो चुका है, जबकि 6,342 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जहां पत्थर की परत बिछाने के बाद बिटुमेन की ऊपरी परत का इंतजार है।
बिटुमेन की कमी ने बढ़ाई परेशानी
सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख पेट्रोलियम उत्पाद बिटुमेन की आपूर्ति और मांग में अंतर बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में बिटुमेन का घरेलू उत्पादन करीब 50 लाख टन पर स्थिर है, जबकि खपत बढ़कर लगभग 87.4 लाख टन हो गई है। इसके चलते बाजार में आपूर्ति का दबाव बना हुआ है।
महंगे बिटुमेन के कारण ठेकेदारों की लागत बढ़ गई है। कई ठेकेदारों ने मौजूदा दरों पर काम करना आर्थिक रूप से मुश्किल बताते हुए सरकार से टेंडर दरों में संशोधन की मांग की है। अनुबंधों में बिटुमेन की कीमत में बदलाव को ध्यान में रखने का प्रावधान होने के कारण सरकार के सामने दरों में संशोधन का विकल्प भी मौजूद है।
सड़क निर्माण की रफ्तार हुई धीमी
बिटुमेन की कमी और बढ़ी कीमतों का असर सड़क निर्माण की रफ्तार पर भी पड़ा है। पहले जहां संबंधित विभागों के तहत प्रतिदिन करीब 100 किलोमीटर सड़क की मरम्मत का काम होने की बात कही गई थी, वहीं बाद में यह गति करीब 25 किलोमीटर प्रतिदिन तक आने की जानकारी सामने आई। बारिश ने भी निर्माण कार्य को प्रभावित किया है।
पंजाब में चुनाव से पहले सड़क परियोजनाओं को पूरा करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बिटुमेन की उपलब्धता, बढ़ती लागत और परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त धन की जरूरत अब सड़क निर्माण अभियान के सामने प्रमुख चुनौती बन गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

