फरीदाबाद में सूचना के अधिकार यानी RTI से जुड़ा एक मामला नगर निगम के लिए महंगा साबित हुआ है। पांच साल से अधिक समय तक RTI आवेदन का जवाब लंबित रखने पर फरीदाबाद नगर निगम को आवेदक को 10 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा।
मामले में आवेदक ने नगर निगम से RTI के तहत जानकारी मांगी थी। हालांकि, निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई और मामला लंबे समय तक लंबित रहा। करीब पांच साल से अधिक समय बीतने के बावजूद जवाब नहीं मिलने पर मामला संबंधित सूचना आयोग के समक्ष पहुंचा।
मामले की सुनवाई के दौरान RTI आवेदन पर समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर नगर निगम से जवाब मांगा गया। इसके बाद आयोग ने आवेदक को हुई परेशानी और सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम पर 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।
इस फैसले के बाद RTI आवेदनों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी एक बार फिर चर्चा में है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराना संबंधित लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी होती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

