डेमोग्राफी कमेटी का बड़ा कदम, राज्यों से मांगा पिछले 15 साल का ‘धार्मिक आबादी’ का जिलावार डेटा

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केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत बनी ‘जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति’ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिलों, औद्योगिक क्लस्टर और सीमावर्ती जिलों में पिछले 15 वर्षों में धार्मिक आबादी में आए बदलावों का डाटा मांगा है।

समिति ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को इस आशय का एक पत्र भेजकर 2011 से आदिवासी आबादी की धार्मिक संरचना का डाटा भी मांगा है। सरकार ने जस्टिस (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नवलेकर की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया था।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2025 को हाई पावर्ड डेमोग्राफी मिशन की घोषणा की थी, जिसके फलस्वरूप उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था।

पत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समिति ने “समय-क्रम के अनुसार डाटा” (जो वर्षों में आए बदलावों को दिखाए) के साथ-साथ राज्य सरकारों से आबादी में आए बड़े बदलावों पर उनका आकलन भी पूछा है।

राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि यह डाटा जहां तक संभव हो जिलों के सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध आंकड़ों से इकट्ठा किया जाए।

सूत्रों ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पिछले 15 वर्षों के जन्म पंजीकरण का धर्मवार और जिलावार डाटा देने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा 21 दिन की कानूनी समयसीमा के बाद हुए पंजीकरण, संदिग्ध धोखाधड़ी के मामलों और संस्थागत व गैर-संस्थागत जन्मों की जानकारी भी मांगी गई है।

सरकारों से मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों आदि जैसे धार्मिक ढांचों पर उनके द्वारा किए गए सर्वेक्षणों की जानकारी देने के साथ-साथ आधार, वोटर कार्ड या राशन कार्ड के नामांकन में अचानक आए बदलावों की जानकारी भी मांगी गई है।

वाहन पंजीकरण पर परिवहन विभाग के धर्मवार डाटा, सीमावर्ती जिलों में वाणिज्यिक वाहन लाइसेंस में अचानक बढ़ोतरी, आदिवासी इलाकों में संपत्ति हस्तांतरण के पैटर्न और आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण व कब्जे की जानकारी भी मांगी गई है।

राज्यों से पिछले 15 वर्षों में आदिवासी इलाकों में बने सरकारी, सहायता-प्राप्त और निजी धार्मिक जैसे शैक्षणिक संस्थानों की जानकारी भी देने को कहा गया है। प्रशासन से स्थानीय आबादी और सामाजिक ढांचे पर पड़ने वाले असर का आकलन भी मांगा गया है।

राज्यों को आ रही आंकड़े एकत्रित करने में दिक्कतें

सूत्रों का कहना है कि राज्यों को धर्म के आधार पर इतना बड़ा डाटा इकट्ठा करने में मुश्किल हो रही है क्योंकि इन मानकों पर डाटा इकट्ठा नहीं किया जाता।

इस बारे में पूछे जाने पर उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि डाटा इकट्ठा करने का काम अभी शुरुआती चरण में है और राज्यों को ऐसा डाटा देने को मजबूर नहीं किया जाएगा जो मौजूद ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर डाटा उपलब्ध नहीं होता है, तो इस तरह के पैटर्न का अध्ययन करने की प्रक्रिया के दौरान कुछ अन्य तरीके अपनाए जा सकते हैं।

एक सरकारी बयान में कहा गया है कि एक बैठक में उच्चस्तरीय समिति ने केंद्रीय गृह मंत्री को बताया कि वे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा करेंगे ताकि राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन से जमीनी स्तर की जानकारी मिल सके और आबादी में बदलाव से जुड़े विषयों पर फीडबैक पाने के लिए केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों से बातचीत की जा सके।

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