बेबी फूड पैकेटों पर नहीं दिखेगी मां-बच्चे की फोटो, महाराष्ट्र FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे का आदेश
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पिछले कुछ महीनों में साफ-सफाई और खाने-पीने की चीजों में गड़बड़ी को लेकर सख्ती की है। अब महाराष्ट्र में FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंडे की टीम ने बेबी फूड प्रोडक्ट बेचने वाले ब्रांड्स के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
‘मां का दूध ही सबसे अच्छा’
एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने बेबी फूड ब्रांड्स पर सख्ती की है। एफडीए ने नियम कड़े कर दिए हैं और यह पक्का किया है कि इस बात का प्रचार हो कि बच्चों के लिए मां का दूध सबसे अच्छा होता है।
एफडीए ने बेबी फूड बनाने वाली कंपनियों को आदेश दिया है कि वे अपने सभी पैकेट पर ‘माँ का दूध सबसे अच्छा है’ (Mother’s Milk Is Best) का मैसेज लिखें।
तुकाराम मुंडे के इस आदेश का मतलब फॉर्मूला मिल्क पर रोक लगाना नहीं है। फॉर्मूला प्रोडक्ट्स की इजाजत होगी, लेकिन बनाने वालों को गाइडलाइंस का पालन करना होगा।
एफडीए का यह आदेश सभी बेबी फूड प्रोडक्ट्स पर लागू होता है, जिसमें दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अनाज और सप्लीमेंट्री फूड शामिल हैं। उन्होंने प्रमोशन पर भी रोक लगा दी है और कहा है कि अब कोई फ्री सैंपल या डिस्काउंट कूपन नहीं दिए जा सकेंगे।
तुकाराम मुंडे ने साफ तौर पर कहा कि पैकेजिंग पर यह साफ लिखा होना चाहिए कि प्रोडक्ट छह महीने से ज्यादा उम्र के बच्चों को सिर्फ सप्लीमेंट्री फूड के तौर पर और डॉक्टर की सलाह पर ही दिया जाना चाहिए।
नियमों के पालन में गड़बड़ी
तुकाराम मुंडे ने इस कदम के बारे में बताते हुए कहा, ‘FDA ने सर्वे में नियमों के पालन से जुड़ी कई कमियां पाईं। मां के दूध के महत्व को बताने वाले मैसेज का न होना एक बड़ी गड़बड़ी है।’
मुंडे ने कहा, ‘ये कदम मां के दूध को बढ़ावा देने और यह पक्का करने के लिए उठाए जा रहे हैं कि बच्चों को सही पोषण मिले। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में मां का दूध पिलाने की दरें चौंकाने वाली हैं, जिसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है और इससे हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याएं कम उम्र में ही हो रही हैं।’
तुकाराम मुंडे ने डेटा का हवाला देते हुए बताया, ‘महाराष्ट्र में जन्म के एक घंटे से लेकर 6 महीने तक मां का दूध पिलाने की दर शहरी इलाकों में 52.8 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 75.2 प्रतिशत थी।’
मुंडे ने सर्वे के डेटा का जिक्र करते हुए कहा, ’10-12 साल की उम्र के 25 प्रतिशत बच्चों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी।’ मुंडे का दावा है कि यह मां का दूध न पिलाने का नतीजा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

