पंजाब: गमाडा मुख्यालय में ED क्यों कर रही रेड? तीन दिन से जांच में जुटे 100 से ज्यादा कर्मचारी; पढ़ें टाइमलाइन
मुल्लांपुर के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) मामले की जांच से शुरू हुई एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) की पड़ताल अब गमाडा की पूरी सीएलयू व्यवस्था तक पहुंच गई है।
ईडी की कार्रवाई गमाडा कार्यालय और पंजाब के नौकरशाहों के घर पर लगातार तीसरे दिन भी जारी है। शुरुआत में जांच में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और सहमति पत्र, सीएलयू मंजूरी की प्रक्रिया और ईडब्ल्यूएस जमीन से जुड़े बिंदु सामने आए।
इसके बाद 7 मई को ईडी ने मोहाली और चंडीगढ़ में 12 ठिकानों पर कार्रवाई की। इनमें सनटेक सिटी, अजय सहगल, एबीएस टाउनशिप्स, अल्टस बिल्डर्स और धीर कंस्ट्रक्शंस से जुड़े ठिकाने शामिल थे।
17 मई को जांच गमाडा के स्तर तक पहुंची। ईडी ने गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर से न्यू चंडीगढ़, इको सिटी-3 और मुल्लांपुर से जुड़े सीएलयू रिकॉर्ड मांगे।
इसके बाद जांच केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रही और सीएलयू मंजूरी, लेआउट में बदलाव, जमीन अधिग्रहण और फाइलों की मूवमेंट की पड़ताल शुरू हुई।
जांच की कड़ी में मौजूदा और पूर्व अधिकारियों से पूछताछ का सिलसिला भी सामने आया। इनमें गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप ऋषि, लैंड एक्विजिशन कलेक्टर रोहित जिंदल, एस्टेट आफिसर अमन गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर सिंह मल्ही, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक (फाइनेंस) राकेश पोपली और चीफ इंजीनियर अजय गर्ग शामिल हैं। हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी विकास गर्ग से जुड़े परिसरों में भी ईडी की कार्रवाई हुई।
इसके बाद जांच का दायरा निजी बिल्डरों से निकलकर गमाडा के अधिकारियों, फाइलों की मूवमेंट और उन फैसलों तक पहुंच गया, जिनसे बिल्डरों को सीएलयू, एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) और अन्य शुल्कों में लाभ मिलने का आरोप है।
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है मामला
जांच की शुरुआती कड़ी में सनटेक सिटी से जुड़े अजय सहगल की गिरफ्तारी भी सामने आई थी। ईडी की पड़ताल में गमाडा और रेरा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका तथा कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू को भी देखा गया।
पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा को भी ईडी के जालंधर कार्यालय में बुलाया गया। नौ सितंबर को वह फाइलों के साथ ईडी कार्यालय पहुंचे थे।
अब जांच में पिछले पांच वर्षों में जारी 50 से अधिक सीएलयू का रिकॉर्ड देखा जा रहा है। इन सीएलयू के दौरान पद पर रहे अधिकारियों और लिए गए फैसलों की भी पड़ताल की जा रही है।
100 करोड़ के नुकसान की जांच
वर्ष 2025 की गमाडा बैठक में करीब 40 करोड़ रुपये के नॉन-कंस्ट्रक्शन चार्ज में राहत दिए जाने की फाइल भी जांच के दायरे में है। इसके साथ दो प्रमुख ऑक्शन साइटों से जुड़े मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित नुकसान के एंगल की भी जांच की जा रही है।
22 सितंबर को ईडी की कार्रवाई गमाडा मुख्यालय तक पहुंची। तीन मंजिलों पर जांच की गई और कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव समेत डिजिटल रिकॉर्ड खंगाले गए।
अधिकारियों से उनके कमरों में पूछताछ हुई। इसी के साथ दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना समेत कई स्थानों पर कार्रवाई हुई। 23 सितंबर को भी जांच जारी रही।
इस तरह मई में एक प्रोजेक्ट और बिल्डर से शुरू हुई जांच अब पांच वर्षों की सीएलयू व्यवस्था, अधिकारियों के कार्यकाल और गमाडा के फैसलों तक पहुंच चुकी है।
टाइमलाइन
- मई की शुरुआत: मुल्लांपुर के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े सीएलयू मामले में ईडी की जांच की शुरुआती कड़ी सामने आई। अजय सहगल की गिरफ्तारी और कथित मनी लांड्रिंग की जांच हुई।
- 7 मई: मोहाली और चंडीगढ़ में 12 ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई। सनटेक सिटी, अजय सहगल और अन्य बिल्डर कंपनियों से जुड़े परिसरों की जांच।
- 17 मई: गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर से न्यू चंडीगढ़, इको सिटी-3 और मुल्लांपुर से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए।
- मई का अंतिम सप्ताह: जांच सीएलयू मंजूरी से आगे बढ़कर फाइल मूवमेंट, लेआउट बदलाव और अधिकारियों की भूमिका तक पहुंची।
- 9 सितंबर: पूर्व मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ईडी जालंधर कार्यालय पहुंचे और फाइलें पेश कीं।
- 22 सितंबर: ईडी की गमाडा मुख्यालय में व्यापक कार्रवाई। तीन मंजिलों पर जांच, डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल और अधिकारियों से पूछताछ।
- 23 सितंबर: जांच दूसरे दिन भी जारी। पिछले पांपांच वर्षों की 50 से अधिक सीएलयू फाइलें और उनसे जुड़े अधिकारियों का रिकॉर्ड जांच के केंद्र में।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

