आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 के 5वें दिन की शुरुआत में ही भारत की झोली में मेडल आ गया। सतनाम सिंह और सलमान खान की भारतीय जोड़ी ने मेंस डबल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक अपने नाम किया।
सतनाम और सलमान 500 मीटर, 1000 मीटर और 1500 मीटर के निशान पर चीनी खिलाड़ियों से सिर्फ आधे सेकंड पीछे दूसरे स्थान पर थे, लेकिन आखिर में पिछड़ गए। एशियाई खेलों में सतनाम का यह दूसरा कांस्य पदक है। वे मेंस क्वाड्रपल स्कल्स टीम का हिस्सा थे, जिसने हांगझोऊ 2023 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
सतनाम सिंह का सफर
सतनाम सिंह का स्पोर्ट्स सफर हैंडबॉल कोर्ट से शुरू हुआ, जहां उन्होंने नेशनल लेवल पर हिस्सा लिया और फिर 2018 में रोइंग की ओर रुख किया। यह बदलाव ओलंपियन स्वर्ण सिंह विर्क से प्रेरित होकर आया, जिन्होंने उनकी शारीरिक क्षमता को पहचाना और उन्हें इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस फैसले ने भारतीय रोइंग में तेजी से आगे बढ़ने की शुरुआत की। पंजाब के मानसा जिले से आने वाले सतनाम ने जल्द ही देश के सबसे होनहार रोअर्स में से एक के तौर पर अपनी पहचान बना ली। उन्होंने 2018 यूथ ओलंपिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 40वीं सीनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप में पुरुषों का सिंगल स्कल्स खिताब जीता। वह ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय नौसेना रोअर बने।
सतनाम ने 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में कॉन्टिनेंटल स्तर पर अपनी पहचान बनाई, जहां वे भारतीय पुरुष क्वाड्रपल स्कल्स क्रू का हिस्सा थे जिसने ब्रॉन्ज मेडल जीता। गेम्स के दौरान एक शुरुआती रेस में शारीरिक चोट लगने के बावजूद, वे भारत को पोडियम पर जगह दिलाने में मदद करने के लिए वापस लौटे, जिससे उनके करियर की पहचान बनी मजबूत इच्छाशक्ति और जज्बा साफ झलका।
सलमान खान की यात्रा
सलमान खान की रोइंग यात्रा 2018 में शुरू हुई, जब वे भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियर ग्रुप (BEG) में शामिल हुए। उनकी काबिलियत को पहचानते हुए उनके कोच सत्यवान, सतीश सिरात और प्रभात मिश्रा ने उन्हें इस खेल से परिचित कराया और सेंटर की रोइंग टीम के लिए चुना। उन्हें जल्द ही सफलता मिली और उन्होंने बटालियन और इंटर-सेंटर प्रतियोगिताओं में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते।
अच्छी शुरुआत के बावजूद सलमान दो बार यह खेल छोड़ने के करीब पहुंच गए थे। दोनों ही मौकों पर उनके कोचों का प्रोत्साहन निर्णायक साबित हुआ। उनकी काबिलियत पर कोचों के भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की और आखिरकार उन्हें प्रतिष्ठित आर्मी रोइंग नोड (ARN) में जगह मिली, जहां उन्होंने सीनियर कोच कुदरत अली और ट्रेनिंग ऑफिसर मेजर नागेंद्र हुड्डा के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ली।
सलमान की लगन से लगातार तरक्की हुई। 2023 में उन्हें ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) में शामिल किया गया, जिससे उन्हें बेहतरीन ट्रेनिंग और स्पोर्ट्स साइंस से जुड़ी मदद मिली। एक साल बाद उन्होंने एशियन रोइंग कप में मेडल जीता। इस कामयाबी के चलते उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर प्रमोशन भी मिला।
अब वे भारत की एशियन गेम्स रोइंग टीम के सदस्य हैं। अपनी यात्रा को याद करते हुए सलमान अपनी सफलता का श्रेय अपने कोचों, ट्रेनरों और सेना के सपोर्ट स्टाफ के अटूट सहयोग को देते हैं। उनके लिए रोइंग का मतलब सिर्फ मेडल जीतना नहीं है, बल्कि गर्व के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करना और भारतीय सेना द्वारा दिए गए मौकों का सम्मान करना भी है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

