Manimahesh yatra: हेलीकॉप्टर और पैदल मार्ग से जयकारे लगाते निकले शिवभक्त, यात्रा को लेकर नियम किए कड़े

1183 Shares

हिमाचल प्रदेश की श्री मणिमहेश कैलाश यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं के लिए बुधवार सुबह बड़ी राहत की खबर सामने आई। प्रशासन की ओर से बुधवार सुबह आठ बजे से मणिमहेश पैदल यात्रा को आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया गया। शिवभक्त जयकारे लगाते हुए मणिमहेश के लिए निकले। वहीं, डीजीसीए की मंजूरी मिलने के बाद भरमौर-गौरीकुंड और होली-गौरीकुंड हेली टैक्सी सेवा भी शुरू हो गई है। इससे यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिली है।

पैदल यात्रा को लेकर नियम कड़े
यात्रा मार्ग की स्थिति और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने इस बार यात्रा के संचालन के लिए सख्त नियम तय किए हैं। रात के समय पैदल यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालुओं को सुबह चार बजे से शाम सात बजे तक ही पैदल यात्रा करने की अनुमति होगी। शाम सात बजे से सुबह चार बजे तक किसी भी परिस्थिति में यात्रा मार्ग पर आवाजाही नहीं की जा सकेगी।

ये दो जगह बेहद संवेदनशील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया है कि मौसम साफ रहने पर भी रात के समय यात्रा की अनुमति नहीं होगी। यात्रा मार्ग पर तोष का गोठ और दुनाली को बेहद संवेदनशील स्थान चिह्नित किया गया है। इन स्थानों पर मौसम साफ रहने के बावजूद पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है।

बारिश होने की स्थिति में यात्रा मार्ग के करीब आठ स्थानों को अति संवेदनशील माना गया है। ऐसे में मौसम खराब होने पर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर मार्ग पर आवाजाही को नियंत्रित किया जा सकता है।

एनडीआरएफ-एसडीआरएफ समेत सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पुलिस, स्वास्थ्य विभाग के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की हैं। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल राहत और बचाव सुविधा उपलब्ध करवाई जा सके।

हेली टैक्सी को मिली डीजीसीए की मंजूरी

उधर, मंगलवार को डीजीसीए की अनुमति के अभाव में अटकी हेली टैक्सी सेवा को भी बुधवार को मंजूरी मिल गई। मंजूरी मिलने के बाद भरमौर-गौरीकुंड और होली-गौरीकुंड हेली टैक्सी सेवा शुरू कर दी गई है। इससे पहले हेली टैक्सी सेवा 25 अगस्त से शुरू होनी प्रस्तावित थी, लेकिन डीजीसीए की आवश्यक अनुमति निर्धारित समय तक नहीं मिलने के कारण सेवा शुरू नहीं हो पाई थी।

डीजीसीए की टीम ने भरमौर और होली में निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां चिह्नित की थीं, जिन्हें प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से दूर कर दिया गया। इसके बाद दिल्ली से आवश्यक मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हुआ।

75 श्रद्धालुओं को करना पड़ा था इंतजार

हेली टैक्सी सेवा के लिए पहले ही ऑनलाइन बुकिंग शुरू कर दी गई थी और करीब 75 श्रद्धालुओं ने सेवा के लिए आवेदन किया था। कई श्रद्धालु हवाई सेवा का लाभ लेने के लिए भरमौर पहुंच भी गए थे, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण मंगलवार को उन्हें इंतजार करना पड़ा। अब मंजूरी मिलने के बाद इन श्रद्धालुओं सहित अन्य यात्रियों को हेली टैक्सी सेवा का लाभ मिल सकेगा।

पंजीकरण शुल्क अब 50 रुपये

यात्रा के दौरान पंजीकरण व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। 22 जून से 24 अगस्त तक इको टूरिज्म सोसाइटी की ओर से एनजीटी के आदेशों के अनुसार पर्यावरण संरक्षण के लिए 100 रुपये शुल्क लिया गया था। इस अवधि में कुल 5352 श्रद्धालुओं से शुल्क लिया गया।

अब यात्रा का संचालन आधिकारिक रूप से न्यास की ओर से किया जा रहा है। इसके तहत इको टूरिज्म सोसाइटी का 100 रुपये पर्यावरण संरक्षण शुल्क बंद कर दिया गया है। अब हड़सर में श्रद्धालुओं से केवल 50 रुपये पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय में ही पैदल यात्रा करें, रात में मार्ग पर जाने का प्रयास न करें और मौसम तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रा और हेली टैक्सी सहित सभी सेवाओं का संचालन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निर्धारित नियमों के तहत ही किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *