करीब तीन साल से फरार चल रहे पंजाब पुलिस के बर्खास्त एआइजी राजजीत सिंह हुंदल को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। राजजीत सिंह ने 24 सितंबर को पटियाला पुलिस के सामने सरेंडर किया। ड्रग तस्करी से जुड़े मामले में नाम सामने आने के बाद से राजजीत सिंह पुलिस और जांच एजेंसियों के निशाने पर थे। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में भी सरेंडर करने की पेशकश की थी।
एसआइटी की रिपोर्ट के बाद हुई थी बर्खास्तगी
ड्रग्स मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) की रिपोर्ट के आधार पर पंजाब सरकार ने अप्रैल 2023 में राजजीत सिंह को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया था। वह पंजाब पुलिस में एआइजी रैंक के अधिकारी थे। ड्रग्स मामले में बर्खास्त किए जाने वाले वह पहले एआइजी स्तर के अधिकारी बने थे। सरकार की कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।
आय से अधिक संपत्ति का भी मामला
राजजीत सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी जांच के दायरे में आया। विजिलेंस ब्यूरो की जांच में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की बात सामने आई। इसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल करती रही हैं।
अदालत ने घोषित किया था भगोड़ा
लगातार अदालत में पेश नहीं होने और गिरफ्तारी से बचने के बाद मोहाली की विशेष अदालत ने राजजीत सिंह को भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की ओर से उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई भी शुरू की गई थी।
लंबे समय से फरार चल रहे राजजीत के अचानक सरेंडर करने के बाद अब पुलिस उनसे ड्रग नेटवर्क, कथित रंगदारी और संपत्तियों से जुड़े मामलों में पूछताछ करेगी। उनकी गिरफ्तारी को लंबे समय से चल रही जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

