अभी गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर संत कबीरनगर के सपा सांसद ने सड़क पर अपनी गाड़ी फंसाकर निषाद समाज की आस्था को आहत किया। वह तैश में अभद्र तरीके से बोले- “कहां धर्म-कर्म के चक्कर में पड़े हो”। इससे निषाद समाज भड़क गया, जिसका बदला उत्तर प्रदेश का निषाद समाज समाजवादी पार्टी को अगले चुनाव में पटकनी देकर लेगा। इसी तरह रायबरेली में एक सपा नेता पुलिस अधिकारियों से भिड़ गया और ‘औक़ात में रहने’, ‘चूड़ियां पहन लो’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किया। पुलिस ने समझदारी से काम किया अन्यथा ये सपाई तो मारपीट पर उतारू थे। इसके बाद यही लोग “विक्टिम कार्ड” खेलकर पुलिस के ख़िलाफ़ धरना देने लगे।
थोड़ी देर में इंस्पेक्ट केएसपी कुमार कुछ जवानों को लेकर वहां पहुंचे और घायल अधिकारियों को अस्पताल पहुंचाया। डीआईजी का कई वर्षों तक इलाज चला और उन्हें कई ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। सालों तक वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके। इस मामले में पुलिस और पीएसी अधिकारियों द्वारा 6 मुकदमें लिखाए गए। लेकिन, जैसे ही अखिलेश यादव 2012 में मुख्यमंत्री बने, उन्होंने 5 मुकदमों में अपने चहेते पुलिस अधिकारियों से फाइनल रिपोर्ट लगवा दी। तत्कालीन डीआईजी (अब डीजी) अशोक कुमार सिंह और पीआरओ रवि कुमार पर जानलेवा हमला, पिस्टल-कारतूस छीनने, आतंक मचाने, आगजनी करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों में दर्ज मुकदमे में चार्ज-शीट लगाई गई। लेकिन, अखिलेश यादव ने उस गंभीर मुकदमे को भी वापस ले लिया। उनकी नजर में एक सीनियर आईपीएस अधिकारी और सब-इंस्पेक्टर की जान की कोई कीमत नहीं थी। जाहिर है कि ये आक्रामक घटना पार्टी के शीर्ष स्तर पर नियोजित की गई थी।
मुरादाबाद सत्र न्यायालय ने समाजवादी पार्टी की सरकार के मुकदमा वापसी के फैसले पर रोक लगा दी और प्रदेश में बीजेपी सरकार आने पर न्यायालय में इसका ट्रायल शुरू हुआ। वर्ष 2025 में 16 दंगाइयों को सत्र न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा मिली। अगर 2017 में समाजवादी सरकार बन गई होती तो तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और सब-इंस्पेक्टर रवि कुमार को कभी न्याय नहीं मिलता। यह इससे भी स्पष्ट होता है कि हिंसा व आगजनी के बीच डीआईजी को छोड़कर भागने वाले पुलिस कर्मियों को विभागीय कार्रवाई के बाद बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन अखिलेश जी ने सत्ता में आते ही उन्हें दोबारा सेवा में लेकर पुरस्कृत किया और मनचाहे जिलों गाजियाबाद, नोएडा, इटावा में पोस्टिंग भी दी। डीआईजी को छोड़कर पुलिस एस्कॉर्ट सहित भागने वाले आईएएस अधिकारी को तो अखिलेश यादव ने लखनऊ का डीएम बनाया।
मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहूंगा कि समाजवादी पार्टी के ये गुंडे आने वाले दिनों में इसी प्रकार की गंभीर आपराधिक घटनाएं कराएंगे। सांप्रदायिक, जातीय दंगे करा कर समाज को बांटकर अपनी पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण करेंगे और बीजेपी पर झूठा आरोप लगाएंगे। ये गलती से सत्ता में आ गए तो प्रदेश में पुनः जंगल-राज होगा। जमीनों पर कब्जे, रंगदारी, व्यापारियों से वसूली, खुलेआम गोकशी, लूटमार, रोज़ाना दंगा-फ़साद शुरू हो जाएगा। मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा होगी, जिसका ख़ामियाज़ा बहुसंख्यक हिंदू भुगतेंगे। विकास रुक जाएगा, गुंडे-मवाली माननीय बनकर उत्पात मचाएंगे। अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, विजय मिश्रा जैसे शातिर अपराधियों का समानांतर शासन कौन भूल सकता है। वक्त बेहद चौकन्ना और सावधान रहने का है।
फर्जी आरोप लगाकर पुलिस कर्मियों पर हमला कर दिया। अराजकता की यह हद रही कि थाना चौकी, पुलिस/पीएसी की गाड़ियों में आग लगा दी गई और पुलिसकर्मियों की रायफलें भी लूट ली गईं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

