पहाड़ की छोटी नदियों और जलधाराओं से अब बिजली उत्पादन की तैयारी है। राज्य सरकार सीमांत जिले पिथौरागढ़ की रामगंगा और गोरीगंगा घाटियों में एक साथ चार लघु जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने जा रही है।
इन चारों की कुल प्रस्तावित क्षमता 62 मेगावाट होगी। खास यह है कि यह क्षमता अकेले यूजेवीएनएल की मौजूदा लघु जलविद्युत परियोजनाओं की कुल 68 मेगावाट क्षमता के लगभग बराबर है।
चार योजनाओं के जरिये जोड़ी जाएगी 62 मेगावाट नई क्षमता
ईस्टर्न रामगंगा घाटी में 15 मेगावाट की मुवानी और 14 मेगावाट की कमतोली परियोजना प्रस्तावित है। वहीं गोरीगंगा घाटी में 21 मेगावाट की जिम्बा मरम और 12 मेगावाट की प्यूंशानी परियोजना विकसित की जानी है। यानी पिथौरागढ़ की दो नदी घाटियों में चार योजनाओं के जरिये 62 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी जाएगी।
चारों परियोजनाओं को निजी विकासकर्ताओं की भागीदारी से बूट आधार पर विकसित किया जाएगा। निजी भागीदार को डीपीआर तैयार करने, वित्तीय प्रबंध, डिजाइन-इंजीनियरिंग, निर्माण तथा संचालन एवं अनुरक्षण तक की जिम्मेदारी निभानी होगी।
रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा
उत्तराखंड में जलविद्युत विकास की पहचान अब तक बड़े बांधों और परियोजनाओं से रही है। इसके समानांतर छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के जरिये स्थानीय जलधाराओं की क्षमता को उपयोग में लाने पर भी जोर दिया जा रहा है। दो से 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए लागू नीति के तहत पिथौरागढ़ की इन चार योजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड अभी 68 मेगावाट की लघु जलविद्युत क्षमता वाली परियोजनाएं संचालित कर रहा है। पिथौरागढ़ में प्रस्तावित 62 मेगावाट का पैकेज इस क्षेत्र में होने वाले विस्तार को बता रहा है।
ऊर्जा निवेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सीमांत जिले में इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से बिजली उत्पादन के साथ निर्माण गतिविधियों, स्थानीय रोजगार और परियोजनाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। पिथौरागढ़ में छोटी जलविद्युत परियोजनाओं का यह समूह छोटी नदियों से बड़े ऊर्जा निवेश की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

