Asian Games में मेडल जीतना नहीं होगा आसान, ओलिंपिक मेडलिस्ट विजेंदर सिंह ने बताया सफलता का ‘सीक्रेट मंत्र’

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 भारत के महान मुक्केबाज और ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह ने आगामी एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन को लेकर उम्मीद जताई है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता को एशियन गेम्स में सीधे दोहराना आसान नहीं होगा, क्योंकि एशियाई स्तर पर भारत को उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, चीन और जापान जैसे मजबूत मुक्केबाजी देशों की चुनौती मिलेगी।

विजेंदर ने बुधवार को विशेष बातचीत में दैनिक जागरण से बातचीत में कहा, हाल के राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और इसके लिए खिलाड़ियों के साथ-साथ मुक्केबाजी महासंघ को भी श्रेय मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय महिला मुक्केबाज खास तौर पर मजबूत नजर आ रही हैं। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार और प्रिया गंगा से उन्हें काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लवलीना बोरगोहाइ का ओलिंपिक स्तर का अनुभव उनके लिए फायदेमंद हो सकता है।पुरुष वर्ग में उन्होंने सचिन, दीपक भोरिया, अनमोल बेनिवाल और अन्य मुक्केबाजों को भी संभावित पदक दावेदारों में शामिल किया। विजेंदर ने कहा कि मुक्केबाजी में कभी भी पदक को पक्का नहीं माना जा सकता, क्योंकि एक पंच मुकाबले का पूरा रुख बदल सकता है।

उनके मुताबिक भारत एशियन गेम्स में पांच-छह पदक हासिल कर सकता है।विजेंदर ने अपने 2010 एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक की याद भी साझा की। फाइनल में उन्होंने विश्व चैंपियन अब्बास सत्तार को 7-0 से हराया था। विजेंदर ने बताया कि मुकाबले के पहले राउंड में उनका अंगूठा चोटिल हो गया था। इसके बावजूद कोच की रणनीति के मुताबिक उन्होंने अपनी लंबाई का फायदा उठाया, दूरी बनाए रखी और अपने पसंदीदा दाहिने मुक्के से अंक हासिल किए।

इंटरनेट मीडिया से दूरी बनाकर केवल मुकाबले पर ध्यान दें

विजेंदर ने भारतीय मुक्केबाजों को इंटरनेट मीडिया और फोन से दूरी बनाकर सिर्फ मुकाबले पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज खिलाड़ियों के पास पहले से बेहतर सुविधाएं हैं, लेकिन फोन और जल्दी लोकप्रिय होने की चाह उनके ध्यान को भटका सकती है।
उन्होंने भारतीय पुरुष बॉक्सिंग में घरेलू स्तर पर ज्यादा मजबूत प्रतियोगिताएं कराने की जरूरत बताई और उज्बेकिस्तान व कजाखस्तान के साथ ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने को भी उपयोगी बताया। उनके मुताबिक एशियाई खेल मुश्किल चुनौती है, लेकिन भारतीय मुक्केबाज इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हैं।

एशियाई खेलों का आयोजन सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और सोनी लिव पर होगा।

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