मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की याद में रविवार को श्री अकाल तख्त साहिब की सरपरस्ती में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से श्री हरिमंदिर साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा गुरबख्श सिंह जी में समागम करवाया गया।
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि वर्ष 1982 से 1994 के दौरान पंजाब में सरकारी दमन के चलते बड़ी संख्या में सिख युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को शहीद किया गया।
कई शवों को लावारिस बताकर जला दिया गया और नदियों में बहा दिया गया। जसवंत सिंह खालड़ा इन लावारिस शवों के वारिस बने और उन्होंने दिन-रात मेहनत करके इनकी जानकारी जुटाई।
इसी कार्य के दौरान उन्हें भी अगवा कर शहीद कर दिया गया। खालड़ा ने गुरु तेग बहादुर साहिब के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा। उन्होंने न किसी का भय माना और न ही किसी को भयभीत किया। अपने जीवन को कौम और मानवाधिकारों के लिए समर्पित कर उन्होंने शहादत प्राप्त की।
शहीद हुए लोगों का विवरण एकत्र करेगी एसजीपीसी
ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि हरिके में शहीदी यादगार स्थापित करने और वर्ष 1982 से 1994 के दौरान शहीद किए गए लोगों का विवरण एकत्र करने का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। यह कार्य एसजीपीसी की ओर से किया जाएगा और इसकी सरपरस्ती श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा की जाएगी।
एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा मानवाधिकार, हक, सच और इंसाफ के लिए संघर्ष करने वाली महान कौमी शख्सियत थे। उन्होंने अपना जीवन दूसरों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
मानवाधिकार और इंसाफ के लिए शहादत
घरों से उठाकर यातनाएं देने के बाद शहीद किए गए युवाओं को इंसाफ दिलाने के संघर्ष में भाई खालड़ा ने अपनी शहादत दी। खालड़ा के स्वजनों ने भी सरकारी दमन का सामना किया और उनके द्वारा शुरू किए गए संघर्ष को आगे बढ़ाया।
श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश पर हरिके में भाई खालड़ा की शहीदी यादगार बनाने के लिए एसजीपीसी ने सब-कमेटी गठित की है। कमेटी उपयुक्त जगह हासिल करने के प्रयास कर रही है। जगह मिलते ही यादगार के निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
समागम के दौरान भाई जसवंत सिंह खालड़ा की बहन बीबी बलबीर कौर और कुलदीप सिंह बचड़े की पत्नी बीबी कवलजीत कौर को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर एसजीपीसी के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मन्नण, अंतिरंग सदस्य मंगविंदर सिंह खापड़खेड़ी, सदस्य भाई राजिंदर सिंह मेहता, एडवोकेट भगवंत सिंह स्यालका सहित एसजीपीसी के अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

