बच्चा खुद के रंग-रूप और बॉडी इमेज को लेकर रहता है हीनभावना में? पेरेंट्स इन तरीकों से बनाएं उन्हें कॉन्फिडेंट
अक्सर पेरेंट्स समझते हैं कि बच्चे का आत्मविश्वास केवल उनकी पढ़ाई और करियर के लिए ही जरूरी है। जबकि उन्हें यह समझने की जरूरत है कि ज्यादातर बच्चे अपने रंग-रूप और शरीर को लेकर भी हीनभावना में रहते हैं, ऐसे में जरूरी है कि इन चीजों को लेकर भी उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ाया जाए।
खुद की बॉडी को लेकर पॉजिटिव रहें
आप कैसे दिखते हैं या आपका रंग कैसा है, इस बारे में बच्चे के सामने बात करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, दूसरों के लुक्स पर भी कमेन्ट करने से बचें। ऐसा इसलिए क्योंकि पेरेंट्स बच्चों के सबसे पहले रोल मॉडल होते हैं। जब पेरेंट्स अपने आप को लेकर आत्मविश्वासी रहेंगे तो यही खूबी बच्चों में भी आएगी।
रंग रूप की नहीं क्षमता की तारीफ करें
बच्चों का उनके रंग-रूप और बॉडी से ध्यान हटाने के लिए जरूरी है कि उनके बॉडी एक्शन की तारीफ की जाए। जैसे- अगर बच्चे ने अच्छी जंप या रनिंग की है तो उसकी तारीफ करें, उन्हें बताएं कि हेल्दी शरीर खूबसूरत शरीर से ज्यादा मायने रखता है।
मीडिया के प्रभाव को दिखाएं
पॉजिटिव बातें करने के साथ बच्चों को मीडिया में दिखाए जा रहे नकारात्मक प्रभाव के बारे में बताएं, ताकि उन बातों का बच्चे के मन पर कोई असर न पड़े। साथ ही, उन्हें यह भी बताएं कि हर किसी का बॉडी टाइप अलग-अलग होता है, इसलिए दूसरों से अपनी तुलना करना गलत है।
सेल्फ लव की भावना बढ़ाएं
छोटे बच्चों को अपने शरीर का सम्मान करना सिखाना एक बहुत जरूरी कदम है जो उनमें आगे चलकर खुद के प्रति हीन भावना से बचा सकता है। उन्हें समझाएं कि अपने शरीर के हर अंग को जबरदस्ती प्यार करने के बजाय सम्मान करना और देखभाल करना आदर्श विकल्प है।
बच्चे की भावनाओं को करुणा से संभालें
अगर बच्चा अपने शरीर या रंग को लेकर किसी तरह की एंग्जायटी, निराशा या शर्म का सामना कर रहा है तो उस समय उनपर गुस्सा करने के बजाय प्यार से संभालें। खुलकर बात करने से बच्चों की अपने मन की भावनाओं को पेरेंट्स से शेयर करने की झिझक खत्म होती है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

