सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच एमओयू, ड्रोन खतरों से निपटने की तैयारी होगी और मजबूत
नई दिल्ली। देश के महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील बुनियादी ढांचे को तेजी से उभरते ड्रोन एवं अन्य हवाई खतरों से सुरक्षित रखने की दिशा में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी क्रम में सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के बीच सीआईएसएफ मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य ड्रोन एवं प्रति-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को और अधिक मजबूत करना है।

एमओयू पर सीआईएसएफ की ओर से डॉ. सी. डी. नायक, उप महानिरीक्षक एवं प्रधानाचार्य, एमपीआरटीसी बहरोड़ तथा ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से अध्यक्ष श्री स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में अपर महानिदेशक (उत्तर) श्री सुधीर कुमार, अपर महानिदेशक (मुख्यालय) श्री विजय प्रकाश सहित बल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहीं ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से श्रीमती शिरीन जोशी, निदेशक, सुश्री शिवांगी प्रकाश, सह निदेशक तथा सुश्री समा सहगल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय प्रमुख ने सहभागिता की।

370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात है सीआईएसएफ
सीआईएसएफ देशभर में 370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात है। इनमें विमानन क्षेत्र, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र, तेल शोधनशालाएं तथा अन्य अति-संवेदनशील प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन प्रतिष्ठानों को विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए सीआईएसएफ को नोडल एजेंसी के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ड्रोन तकनीक के तेजी से विस्तार और इसके संभावित दुरुपयोग को देखते हुए संदिग्ध ड्रोन की समय रहते पहचान, निगरानी, ट्रैकिंग और प्रभावी प्रति-कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। ऐसे में सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच हुआ यह समझौता भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
3 हजार से अधिक जवानों को ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण
सीआईएसएफ ने ड्रोन तकनीक को अपनी परिचालन व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में पहले से ही महत्वपूर्ण कार्य किया है। बल के 3,000 से अधिक सदस्यों को ड्रोन एवं प्रति-ड्रोन कार्यप्रणाली का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा सीआईएसएफ की लगभग 80 इकाइयां निगरानी, संभावित हवाई खतरों की पहचान और प्रशिक्षण गतिविधियों में ड्रोन तकनीक का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रही हैं। बल ने इस क्षेत्र में विशेषज्ञों का एक दल भी गठित किया है, जो परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप ड्रोन तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आरटीसी बहरोड़ बनेगा उत्कृष्टता केंद्र
एमओयू के तहत सीआईएसएफ के भर्ती प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी), बहरोड़ को ड्रोन एवं प्रति-ड्रोन प्रणालियों के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित करने की योजना है। यह पहल गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी। ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स और तकनीकी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सीआईएसएफ की तकनीकी क्षमता बढ़ाने, व्यावहारिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में सहयोग करेगा।

महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती की बनेगी रूपरेखा
समझौते के अंतर्गत देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर प्रति-ड्रोन प्रणालियों की तैनाती के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP), तैनाती की रूपरेखा और प्रायोगिक परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।इसके साथ ही संदिग्ध ड्रोन की गतिविधियों के विश्लेषण, जांच और घटना के बाद आकलन के लिए स्वदेशी न्यायिक-विज्ञान उपकरणों एवं प्रक्रियाओं को विकसित करने और स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
संयुक्त अभ्यास से परखी जाएगी सुरक्षा तैयारियां
बदलते हवाई खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ और डीएफआई के बीच संयुक्त अभ्यास एवं विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों पर आधारित ड्रिल आयोजित की जाएंगी। इन अभ्यासों के माध्यम से ड्रोन की पहचान, निगरानी, पता लगाने, प्रति-कार्रवाई और घटना के बाद की जांच एवं प्रतिक्रिया संबंधी तैयारियों को परखा जाएगा।इसके अलावा तकनीकी मानकों, परिचालन प्रक्रियाओं और संभावित खतरा परिदृश्यों की समझ बढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा नवाचार आधारित चैलेंज प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे।
महानिदेशक प्रवीर रंजन ने साझेदारी को बताया महत्वपूर्ण
इस अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन सीआईएसएफ के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन एवं प्रति-ड्रोन प्रणालियों के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।उन्होंने विश्वास जताया कि सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया की यह साझेदारी गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। डीएफआई की सहभागिता से वास्तविक परिस्थितियों में बदलते ड्रोन खतरों के विरुद्ध सीआईएसएफ की तैयारियों का परीक्षण करने, मौजूदा प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं की कमियों को चिन्हित करने तथा आवश्यक प्रति-कार्रवाई क्षमताओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
भारतीय ड्रोन उद्योग देगा सीआईएसएफ को तकनीकी सहयोग
ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष श्री स्मित शाह ने कहा कि भारतीय ड्रोन उद्योग देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस साझेदारी के माध्यम से सीआईएसएफ की परिचालन आवश्यकताओं को स्वदेशी तकनीकी नवाचारों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।उन्होंने कहा कि वास्तविक परिस्थितियों में भारतीय स्टार्टअप्स की तकनीकी क्षमताओं का परीक्षण, प्रभावी न्यायिक-विज्ञान उपकरणों का विकास और विशेष प्रशिक्षण मंचों की स्थापना देश को तकनीकी रूप से सक्षम तथा आत्मनिर्भर सुरक्षा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
सीआईएसएफ एनसीएल सिंगरौली के वरिष्ठ कमांडेन्ट खिल्लारे एसपी ने की पहल की सराहना
इस महत्वपूर्ण पहल की सराहना करते हुए सीआईएसएफ इकाई एनसीएल सिंगरौली के वरिष्ठ कमांडेन्ट खिल्लारे एसपी ने कहा कि ड्रोन एवं प्रति-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सीआईएसएफ और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीच हुआ यह सहयोग बल की परिचालन तैयारियों को नई दिशा प्रदान करेगा।उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन आधारित निगरानी, संभावित खतरों की समय रहते पहचान और प्रति-ड्रोन क्षमताओं का विकास बेहद आवश्यक हो गया है। इस पहल से आने वाले समय में सीआईएसएफ कर्मियों को आधुनिक तकनीक और नवीन परिचालन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से बल के जवानों की परिचालन क्षमता, तत्परता और प्रभावशीलता और अधिक मजबूत होगी तथा देश के महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

