सिंगरौली: पार्किंग से फायर सेफ्टी तक… ओम साईं हॉस्पिटल को किस आधार पर मिली अनुमति?

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वैढ़न। जिला मुख्यालय वैढ़न में संचालित ओम साईं हॉस्पिटल की व्यवस्थाओं और भवन से जुड़े नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल के बाहर की स्थिति को देखकर सबसे बड़ा सवाल पार्किंग व्यवस्था को लेकर है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के वाहनों के लिए अलग से पर्याप्त निजी पार्किंग की व्यवस्था दिखाई नहीं देती। ऐसे में सड़क किनारे वाहनों की आवाजाही से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ आपात स्थिति में परेशानी की आशंका भी बनी रहती है।अब ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि अस्पताल को संचालन की अनुमति किन मानकों और दस्तावेजों के आधार पर दी गई। खासकर मरीजों की सुरक्षा से जुड़े फायर सेफ्टी मानकों की जांच को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग सामने आ रही है।

फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी सवाल

सूत्रों के अनुसार अस्पताल में फायर सेफ्टी से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर सवाल हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग को अस्पताल की मौके पर जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि फायर एनओसी और अग्नि सुरक्षा से संबंधित सभी जरूरी मानक पूरे हैं या नहीं।

अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर आग से बचाव के इंतजाम केवल कागजों तक सीमित नहीं होने चाहिए। आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के रास्ते, अग्निशमन उपकरण और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की मौके पर उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।

भवन अनुमति को लेकर भी उठ रहे सवाल

अस्पताल की बिल्डिंग अनुमति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि भवन का मौजूदा निर्माण स्वीकृत नक्शे और अनुमति की शर्तों के अनुरूप है या नहीं, इसकी जांच की आवश्यकता है। यदि अस्पताल भवन की वर्तमान संरचना और स्वीकृत भवन अनुज्ञा में अंतर है तो संबंधित स्थानीय निकाय को रिकॉर्ड के साथ मौके का मिलान करना चाहिए। आखिर अस्पताल संचालन की अनुमति देने से पहले भवन संबंधी दस्तावेजों और निर्माण की जांच किस स्तर पर की गई थी, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।

बिजली विभाग के कर्मचारियों से विवाद:

अस्पताल संचालक से जुड़े एक अन्य विवाद की भी चर्चा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ कथित गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के आरोपों को लेकर कोतवाली थाने में मामला दर्ज हुआ है। हालांकि इस प्रकरण में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की, इसकी स्थिति भी सार्वजनिक नहीं है। सूत्र बताते हैं कि रसूख के बल पर संबंधित अस्पताल संचालक मामले की जांच को भी प्रभावित करने में लगा हुआ है।

क्या जांच को प्रभावित करने की कोशिश?

सूत्र बता रहे हैं कि अस्पताल संचालक अपने प्रभाव के जरिए संबंधित मामलों की जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और प्रशासन के लिए जरूरी है कि किसी भी शिकायत या प्रकरण की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष तरीके से की जाए।

जिम्मेदार विभागों की जांच से साफ होगी तस्वीर

पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम/स्थानीय निकाय और अग्निशमन विभाग की भूमिका अहम हो जाती है। अस्पताल की संचालन अनुमति, भवन अनुज्ञा, फायर सेफ्टी संबंधी दस्तावेज, पार्किंग व्यवस्था और अन्य आवश्यक अनुमतियों की जांच यदि एक साथ की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अस्पताल ने सभी निर्धारित मानक पूरे किए हैं तो संबंधित विभाग रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करते? और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

अब निगाह प्रशासन की जांच पर है। अस्पताल से जुड़े आरोपों की सच्चाई दस्तावेजी जांच और मौके के निरीक्षण से ही सामने आएगी। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग जोर पकड़ रही है।

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