ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से जान गंवाने वाले हरियाणा रोडवेज के चालक के परिवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राहत देते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 94 हजार 780 रुपये कर दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि भारी वाहन चलाने वाले कर्मचारी को लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक परिश्रम करना पड़ता है और ऐसी परिस्थितियां हृदय संबंधी परेशानी को बढ़ा सकती हैं। यदि रोजगार और कर्मचारी की मृत्यु के बीच संबंध स्थापित हो तो ऐसी मृत्यु को रोजगार के दौरान हुई मृत्यु माना जा सकता है।
जस्टिस हरकेश मनुजा ने यह आदेश हरियाणा रोडवेज की अपील और मृतक की पत्नी रोशनी देवी सहित अन्य आश्रितों की प्रति-आपत्ति पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला चालक जोगिंदर सिंह की मृत्यु से जुड़ा है। 24 जनवरी 1994 को जोगिंदर सिंह हरियाणा रोडवेज की बस लेकर जगाधरी से पलवल जा रहे थे।
ड्यूटी के दौरान हुई थी मौत
ड्यूटी के दौरान उन्हें घातक हार्ट अटैक हुआ और उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद आश्रितों ने मुआवजे के लिए दावा किया था। रोहतक के श्रमिक क्षतिपूर्ति आयुक्त ने 75 हजार 824 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर मुआवजे से इन्कार नहीं किया जा सकता कि कर्मचारी की मृत्यु हार्ट अटैक से हुई।
अदालत ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रोजगार की प्रकृति, कार्य के दौरान होने वाला परिश्रम और अन्य परिस्थितियां कर्मचारी की हृदय संबंधी स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। चालक के मामले में रोजगार और मृत्यु के बीच आवश्यक संबंध मौजूद पाया गया।
कुल 94780 रुपये निर्धारित हुए
अदालत ने मुआवजे की राशि की दोबारा गणना करते हुए पाया कि मृत्यु के समय जोगिंदर सिंह की आयु 38 वर्ष थी। उस समय कानून के तहत मासिक वेतन की अधिकतम सीमा एक हजार रुपये थी। 38 वर्ष की आयु के लिए निर्धारित 189.56 गुणक के आधार पर आधे मासिक वेतन की गणना करने पर कुल मुआवजा 94 हजार 780 रुपये निर्धारित हुआ।
ब्याज के संबंध में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज दुर्घटना की तारीख से ही देय होगा। इसलिए हरियाणा रोडवेज को 94 हजार 780 रुपये पर 24 जनवरी 1994 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। भुगतान में देरी पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
करीब चार वर्ष तक मुआवजा जमा नहीं किए जाने को देखते हुए 10 प्रतिशत जुर्माने को बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया। इस तरह 94,780 रुपये की मुआवजा राशि पर 18 हजार 956 रुपये अतिरिक्त जुर्माना भी देना होगा।
हाईकोर्ट ने खारिज की परिवहन विभाग की अपील
हाईकोर्ट ने हरियाणा रोडवेज की अपील खारिज कर दी और मृतक के परिवार की प्रति-आपत्ति को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए संशोधित मुआवजा देने का आदेश दिया। रोडवेज को प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर पूरी राशि जमा करनी होगी। राशि जमा नहीं करने पर आश्रित परिवार कानून के अनुसार वसूली की कार्रवाई कर सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

