जर्मन कार कंपनी फॉक्सवैगन खर्च कम करने की एक बड़ी योजना के तहत 2030 तक एक लाख कर्मचारियों को नौकरियों से निकालेंगी। यह वैश्विक ऑटो इंडस्ट्री में अब तक का सबसे बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) है।
बता दें कि कंपनी ने कुछ दिनारें पहले 50 हजार नौकरियों में कटौती का एलान किया था और अब लगभग 50 हजार और पद कम करने की घोषणा की है। इस तरह कुल कटौती समूह के कुल कर्मचारियों की संख्या का लगभग 15 प्रतिशत है।
फॉक्सवैगन समूह ने एक बयान में कहा, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा, बदलती मांग और तकनीकी बदलावों को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या को आर्थिक हकीकत के अनुरूप बनाना जरूरी है।
फॉक्सवैगन के पास स्कोडा, सीट, पोर्श, कप्रा और लेम्बोर्गिनी जैसे ब्रांडों में कुल मिलाकर 6.5 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं। समूह की योजना 2035 तक अपने मॉपोर्डल पोर्टफोलियो को लगभग 50 प्रतिशत तक घटाने की है।
कंपनी ने कहा, प्राथमिकता वाले मॉडलों का मकसद डिजाइन और टेक्नोलॉजी में बेहतर प्रदर्शन करना है और कम वेरिएंट पर ध्यान केंद्रित करके लाभ उठाना है।
समूह चीनी ऑटोमोटिव बाजार में विकास की बदली हुई उम्मीदों के अनुसार खुद को ढाल रहा है और ग्लोबल साउथ की ओर अपने निर्यात कारोबार का विस्तार कर रहा है।
कंपनी ने कहा, गैर-रणनीतिक गतिविधियों को बेच दिया जाएगा या उन्हें नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा। रियल एस्टेट पोर्टफोलियो की भी समीक्षा की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद एक्र छोटा और कुशल ढांचा बनाना और पूंजी का अधिक प्रभावी तरीके से उपयोग करना है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

