बांके बिहारी तो सब जाते हैं, पर मथुरा का यह चमत्कारी मंदिर देखा है? कान्हा संग राधा नहीं, दासी की होती है पूजा

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 जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन से लेकर देश-दुनिया के हर कोने में मंदिरों में एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। जब भी हम किसी कृष्ण मंदिर में जाते हैं, तो हमारी आंखें स्वाभाविक रूप से ठाकुर जी के साथ राधारानी को ही खोजती हैं।

गर, जरा सोचिए कि आप एक ऐसे मंदिर में जाएं जहां कान्हा के साथ राधा जी न होकर कोई और खड़ी हों? जी हां, कृष्ण की नगरी मथुरा में 500 साल पुराना एक ऐसा ही चमत्कारी मंदिर मौजूद है, जो दुनिया के बाकी तमाम मंदिरों से बिल्कुल जुदा है।मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर बसे इस रहस्यमयी मंदिर में श्रीकृष्ण के साथ उनकी एक ऐसी भक्त विराजमान हैं, जिसे दुनिया ने खूब ताने दिए। आइए, इस जन्माष्टमी पर आपको बताते हैं मथुरा के ‘श्रीकृष्ण कुब्जा मंदिर’ के बारे में, जहां दर्शन भर से स्किन से जुड़ी परेशानियां दूर होने का दावा किया जाता है।

चर्म रोगों को दूर करने वाला चमत्कारी दरबार

उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित ‘श्रीकृष्ण कुब्जा मंदिर’ को लेकर मान्यता है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां प्रभु के दर्शन मात्र से त्वचा से जुड़ी हर तरह की शारीरिक परेशानियां खत्म हो जाती हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का यह अटूट विश्वास है कि मंदिर के जल से स्नान करने और सच्चे मन से हाजिरी लगाने पर खराब से खराब त्वचा भी निरोगी और सुंदर बन जाती है। इसी आस में दूर-दूर से लोग यहां स्वास्थ्य और सौंदर्य का आशीर्वाद पाने आते हैं।

कौन थीं कुब्जा और क्यों उड़ाया जाता था उनका मजाक?

इस अनोखे मंदिर के पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुब्जा मथुरा के राजा और कान्हा के मामा कंस की एक दासी थी। शारीरिक रूप से वह कुबड़ी थी और उसका चेहरा भी सुंदर नहीं था। अपनी इस बनावट के कारण उसे समाज में काफी तिरस्कार सहना पड़ता था और मथुरा के लोग अक्सर उसकी बदसूरती का मजाक उड़ाते थे। इन तानों की वजह से कुब्जा बहुत कष्ट में जीवन बिता रही थी।

कान्हा के एक स्पर्श ने बदल दी दासी की काया

जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा पधारे, तो रास्ते में उनकी नजर कुब्जा पर पड़ी। उसे देखकर भगवान ने उसे बार-बार ‘सुंदरी’ कहकर पुकारा। जिंदगी भर लोगों के ताने सुनने वाली कुब्जा को लगा कि शायद श्रीकृष्ण भी उसका मजाक ही बना रहे हैं। यह सोचकर वह बहुत आहत हुई और रोने लगी।

अपने भक्त की आंखों में आंसू देखकर भगवान ने एक अद्भुत लीला रची। श्रीकृष्ण ने कुब्जा के पैर के ऊपर अपना पैर रखा और अपने हाथों से उसका चेहरा ऊपर की ओर उठाते हुए उसकी झुकी हुई कमर को सीधा कर दिया। मान्यता है कि प्रभु का स्पर्श होते ही एक बड़ा चमत्कार हुआ और कुब्जा का सारा कष्ट मिट गया और वह पलक झपकते ही एक परम सुंदर युवती में बदल गई।

इस घटना के बाद से ही कुब्जा भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्तों में शामिल हो गईं। लोगों की आस्था जागी और इसी वजह से इस मंदिर में मुरलीधर के साथ कुब्जा की मूर्ति स्थापित की गई।

कहां स्थित है यह मंदिर और कैसे पहुंचें?

अगर आप भी इस जन्माष्टमी इस अनोखे मंदिर के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में आना होगा। 500 साल पुराना यह ऐतिहासिक मंदिर मथुरा के प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। मथुरा पहुंचने के बाद आप सीधे परिक्रमा मार्ग जाकर बड़ी आसानी से इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और उनकी परम भक्त कुब्जा के दर्शन कर सकते हैं।

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