शहरीकरण और कंक्रीट के बढ़ते फैलाव के बीच लगातार गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए जम्मू नगर निगम ने वर्षा जल संरक्षण पर काम शुरू कर दिया है। शहर के व्यस्त बिक्रम चौक-गांधीनगर फ्लाईओवर पर बरसने वाले बारिश के पानी को अब नालियों में बहकर बर्बाद होने से बचाया जाएगा।
फिलहाल इस परियोजना का निर्माण कार्य महिला कालेज गांधीनगर के नजदीक फ्लाईओवर के निचले हिस्से में तेजी से चलाया जा रहा है। बिक्रम चौक से गांधीनगर तक बने 1.3 किलोमीटर लंबे इस फ्लाईओवर के नीचे पहले से ही वर्टिकल गार्डन और हरित पट्टियां विकसित हैं। निगम इसी ग्रीन स्ट्रिप में वैज्ञानिक तरीके से रीचार्ज पिट्स बना रहा है।फ्लाईओवर की ऊपरी सतह से आने वाले ड्रेनेज पाइपों को सीधे इन गड्ढों से जोड़ा जा रहा है, जहां बजरी, रेत और चारकोल की परतों से पानी छनकर साफ होता है और भूजल में मिल जाता है। इस व्यवस्था से बारिश के दिनों में सड़कों पर होने वाले भारी जलभराव से भी स्थायी निजात मिलेगी और पौधों की सिंचाई भी प्राकृतिक रूप से हो सकेगी।
करोड़ों का बजट और शहरभर में विस्तार की योजना
इस परियोजना के दायरे और बजट को लेकर भी ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। फ्लाईओवर के इस प्रमुख हिस्से के अलावा पायलट चरण में शहर के 13 बड़े पार्कों में भी ऐसे रीचार्ज शाफ्ट बनाए जा रहे हैं। योजना का अगला विस्तार एक हजार से अधिक सरकारी स्कूलों और प्रमुख कार्यालयों की छतों पर रूफटाप हार्वेस्टिंग लगाने का है।
लागत के लिहाज से प्रति रीचार्ज स्ट्रक्चर पर औसतन 50 हजार से 1.5 लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है, जबकि स्मार्ट सिटी और राष्ट्रीय जल मिशन के कैच द रेन घटक को मिलाकर निगम ने इसके लिए करीब 2.5 करोड़ रुपये का समग्र बजट चरणबद्ध तरीके से आवंटित किया है।
गांधीनगर महिला कालेज के बाद इस काम को एशिया क्रासिंग से डोगरा चौक तक के सभी पिलरों और त्रिकुटा नगर, छन्नी हिम्मत व शास्त्री नगर के सार्वजनिक स्थलों पर भी शुरू किया जाएगा।
नई बिल्डिंग परमिशन के लिए नियम सख्त और जन-जागरूकता
भूजल दोहन पर स्थायी रोक लगाने के लिए निगम प्रशासन ने नियमों में भी कड़ा रुख अपनाया है। शहर में किसी भी नई व्यावसायिक इमारत या बड़े आवासीय परिसर के नक्शे की मंजूरी के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना हार्वेस्टिंग प्रावधान के बिल्डिंग परमिशन जारी नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही आम जनता, व्यापारियों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को वाटर वारियर्स के रूप में जोड़कर जल संचयन के प्रति जागरूक किया जा रहा है ताकि आने वाले समय में जम्मू को गंभीर जल संकट से बचाया जा सके।
जम्मू जिला भूजल दोहन में सुरक्षित श्रेणी में
केंद्रीय भूजल बोर्ड के नवीनतम आकलन में जम्मू जिले को भूजल दोहन के मामले में सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। इसके बावजूद तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अनियंत्रित बोरवेल के कारण पुराने रिहायशी इलाकों में पिछले तीन दशकों में जलस्तर में 10 से 15 मीटर तक की स्थानीय गिरावट आई है, जिससे 1990 के दशक में जो पानी 40 से 50 फीट पर मिल जाता था, उसके लिए अब 120 से 180 फीट तक गहरी ड्रिलिंग करानी पड़ रही है।
जम्मू शहर के गांधीनगर क्षेत्र में भूजल स्तर 6 से 12 मीटर, बख्शी नगर में 10 से 15 मीटर, त्रिकुटा नगर, छन्नी रामा में 12 से 16 मीटर, नार्थ ब्लाक-केनाल हैड में 7 से 10 मीटर और सतवारी क्षेत्र में 9 से 14 मीटर है।
क्या कहते हैं अधिकारी
जम्मू नगर निगम आयुक्त डॉ. देवांश यादव का कहना है कि वर्षा जल संरक्षण समय की जरूरत है। इसके लिए सरकार की तरफ से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन के अंतर्गत इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जम्मू में भी फ्लाईओवर, पुलों के अलावा सरकारी इमारतों, स्कूलों में केच द रेन पर काम शुरू किया गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

