अब राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू में फेफड़ों के कैंसर, टीबी और श्वन रोगों की जाचं और सटीक होगी। जीएमसी जम्मू के सहायक अस्पताल चेस्ट डिजीज अस्पताल, जम्मू में एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड (इबीयूएस) सुविधा सफलतापूर्वक शुरू की है। यह जम्मू संभाग में अपनी तरह की पहली उन्नत और न्यूनतम इनवेसिव जांच सुविधा है।
क्या है एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड?
एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड एक अत्याधुनिक ब्रोंकोस्कोपिक तकनीक है, जिसमें पारंपरिक ब्रोंकोस्कोपी के साथ रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसके माध्यम से डाक्टर वायुमार्ग के भीतर या उसके आसपास मौजूद घावों और लिम्फ नोड्स, विशेष रूप से मीडियास्टिनल और हिलर क्षेत्रों, से न्यूनतम इनवेसिव तरीके से सैंपल प्राप्त कर सकते हैं।
यह तकनीक फेफड़ों के कैंसर, टीबी, लिम्फ नोड्स के बढ़ने तथा अन्य छाती संबंधी बीमारियों के निदान, मूल्यांकन और स्टेजिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लक्षित तरीके से लिम्फ नोड्स और घावों से टिश्यू का सैंपल लेने की सुविधा के कारण कई उपयुक्त मामलों में अधिक जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं की आवश्यकता को कम किया जा सकता है।
मरीजों को मिलेगा बड़ा लाभ
एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू होने से जम्मू संभाग और आसपास के क्षेत्रों के पात्र मरीजों को उन्नत जांच सेवाएं अपने क्षेत्र के करीब ही उपलब्ध हो सकेंगी। इससे मरीजों को इलाज और जांच के लिए प्रदेश के अन्य हिस्सों में रेफर होने की जरूरत कम होगी और यात्रा से जुड़ा आर्थिक व शारीरिक बोझ भी घटेगा।
जीएमसी जम्मू के अनुसार, इस सुविधा की शुरुआत रेस्पिरेटरी मेडिसिन, एनेस्थीसिया और पैथोलाजी विभागों के बीच बेहतर मल्टीडिसिप्लिनरी समन्वय का भी उदाहरण है। इससे सुरक्षित, सटीक और मरीज-केंद्रित उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड सुविधा का शुरू होना जीएमसी जम्मू और चेस्ट डिजीज अस्पताल की आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने, विशेषज्ञ स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने तथा जम्मू संभाग और आसपास के क्षेत्रों में न्यूनतम इनवेसिव जांच एवं उपचार सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

