बंगाल सरकार की नियमों में सख्ती, कोलकाता का इकलौता बूचड़खाना संकट में: ताजा मांस की आपूर्ति ठप

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पश्चिम बंगाल में नई भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रशासन ने पुराने कानूनों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। इसके चलते कोलकाता के एकमात्र बूचड़खाने (तांगरा स्लॉटर हाउस) में गुरुवार से ताजे पशुओं की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है।

बूचड़खाने के अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि फिलहाल परिसर में 180 से ज्यादा पशु रखे हुए हैं, लेकिन सख्त सरकारी मानदंडों को पूरा न करने के कारण केवल 22 पशुओं को ही वध की अनुमति दी गई है। पहले यहां रोजाना 150 से 200 पशुओं का वध होता था, जो कभी-कभी 250 तक भी पहुंच जाता था।

क्या कहता है कानून?

बुधवार को जारी अधिसूचना में पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 और कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2018 के आदेश का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार, बिना वैध स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र के किसी भी पशु का वध नहीं किया जा सकता।

प्रमाण-पत्र केवल कोलकाता नगर निगम के अध्यक्ष या संबंधित पंचायत समिति के सभापति और सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जा सकता है।

पशु को वध के योग्य तभी माना जाएगा…

पशु को वध के योग्य तभी माना जाएगा जब, वह 14 वर्ष से अधिक आयु का हो और काम या प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हो, या चोट, विकृति, या असाध्य बीमारी के कारण अक्षम हो

कोलकाता नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बूचड़खाने के संचालन की अनुमतियां (परमिट) आमतौर पर मार्च में नवीनीकृत की जाती हैं। इस बार विधानसभा चुनाव और आचार संहिता के कारण प्रक्रिया में देरी हुई है।

एक अधिकारी ने कहा कि परमिट शीघ्र ही नवीनीकृत कर दिए जाएंगे। फिलहाल नए पशुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। जो पशु मानकों पर खरे नहीं उतर रहे, उन्हें वापस भेजा जा रहा है।

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