मुंगेर विश्वविद्यालय में करीब पांच महीने चली स्नातक नामांकन प्रक्रिया खत्म हो गई। आंकड़ा सामने है। विश्वविद्यालय के सभी अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों में स्वीकृत 97106 सीटों में 32985 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। 64121 सीटें खाली रह गईं, लेकिन अब असली सवाल नामांकन का नहीं, कक्षा का है।
489 पद, 270 नियमित शिक्षक
उपलब्ध आंकड़े विश्वविद्यालय की तस्वीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामने रखते हैं। 17 अंगीभूत कॉलेजों में 24 विषयों के लिए नियमित शिक्षकों के 489 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 270 शिक्षक ही कार्यरत हैं। यानी 219 पद खाली हैं।
इतना ही नहीं, इन 270 नियमित शिक्षकों में 54 पीजी विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में कॉलेजों में वास्तविक उपलब्ध नियमित शिक्षकों की संख्या और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। नए सत्र में हजारों विद्यार्थियों के पहुंचने के बाद विषयवार शिक्षक-छात्र अनुपात सामने रखना जरूरी हो गया है।
80 अतिथि शिक्षक और 186 संविदा सहायक प्राध्यापक
विश्वविद्यालय के कॉलेजों में 80 अतिथि शिक्षक भी कार्यरत हैं। वहीं नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में 186 संविदा सहायक प्राध्यापक पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यानी नियमित शिक्षकों के साथ अतिथि और संविदा शिक्षकों पर भी बड़ी जिम्मेदारी है।
राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार वाले जिलों में नए राजकीय डिग्री कॉलेज स्थापित किए हैं।
19 नवस्थापित कॉलेजों में 32-32 शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं। असरगंज राजकीय डिग्री कॉलेज में शिक्षकों के 50 पद स्वीकृत हैं। इन कॉलेजों में 10247 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है।
भवन से आगे अब कक्षा की गुणवत्ता की बारी
नए कॉलेज खुलने और विद्यार्थियों का नामांकन हो जाने से उच्च शिक्षा की तस्वीर पूरी नहीं होती। सवाल यह है कि इन कॉलेजों में विषयवार शिक्षक, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, कंप्यूटर, इंटरनेट और पर्याप्त कक्षा-कक्ष उपलब्ध हैं या नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए स्थापित इन संस्थानों की सफलता इसी पर निर्भर करेगी।
विश्वविद्यालय ने नए स्नातक सत्र की कक्षाएं एक अगस्त से शुरू कर दी हैं। यानी शैक्षणिक कैलेंडर की घड़ी चल चुकी है। अब शिक्षक और संसाधन जुटाने की प्रक्रिया के लिए ज्यादा समय नहीं है।
विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं, उपस्थिति, पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा की तैयारी सब कुछ इसी उपलब्ध व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
विश्वविद्यालय को अब कॉलेज वार शिक्षक संख्या, रिक्त पद, विषयवार शिक्षक-छात्र अनुपात, कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला और पुस्तकालय की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे यह साफ होगा कि 32985 विद्यार्थियों को दाखिले के बाद वास्तव में कैसी शैक्षणिक व्यवस्था मिल रही है।
विश्वविद्यालय के पुराने अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों के स्वीकृत 489 सीटों के विरुद्ध कुल 270 शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से ही 54 को पीजी विभागों में पदस्थापित किया गया है। नए राजकीय डिग्री कॉलेजों में से 19 कॉलेजों में शिक्षकों के 32-32 पद तथा असरगंज डिग्री कॉलेज में 50 पद स्वीकृत किया गया है। नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में कुल 186 संविदा सहायक प्राध्यापकों को तैनात किया गया है तथा कॉलेजों में लगभग 80 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। -डॉ. सूरज कोनार, पीआरओ
आंकड़े एक नजर में
- शिक्षकों के कुल सृजित पद – 1147
- 17 पुराने कॉलेजों में सृजित पद – 489
- 19 नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों में – 608
- असरगंज राजकीय डिग्री कॉलेज में -50
- सृजित पद के विरुद्ध कार्यरत – 545
- नियमित शिक्षक – 270
- अतिथि शिक्षक – 80
- संविदा सहायक प्राध्यापक – 186

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

