नेपाल की घाटियों में आए भयानक सैलाब और बाढ़ ने जहां एक ओर चारों तरफ तबाही मचा दी है। वहीं दूसरी ओर इस त्रासदी के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर से घूमने गए पांच दोस्तों के लिए एक कप चाय जिंदगी की सबसे बड़ी सौगात साबित हुई।
इस घटना के सामने आने के बाद एक सवाल खूब पूछे जा रहे हैं। सवाल यह पूछे जा रहे हैं कि आखिर कैसे एक टी ब्रेक ने छत्तीसगढ़ के पांच दोस्तो की जान बचाई? आइए हम आपको बताते हैं।
त्तीसगढ़ के वो पांच दोस्त
पूरे बात को ऐसे समझिए कि रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतींद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर 21 अगस्त को नेपाल की यात्रा पर निकले थे।
बता दें कि यह पूरा वाकया 26 अगस्त की सुबह करीब 9:30 से 10:00 बजे के बीच का है। ये सभी दोस्त नेपाल के धाडिंग जिले के मलेखु कस्बे में पहुंचे थे और पशुपतिनाथ मंदिर जाने के रास्ते में थे। तभी उन्होंने एक होटल पर चाय पीने के लिए रुकने का फैसला किया।
चाय पीने के लिए नहीं रुकते तो….
पांचों दोस्तो में शामिल एक 53 वर्षीय नारायण सेन बताते हैं कि वे उस चाय की टपरी पर अपनी किस्मत की वजह से रुके थे। यदि वे वहां 10-15 मिनट पहले निकल जाते, तो वे सीधे उस बहते हुए सैलाब की चपेट में आ जाते।
नारायण बताते हैं कि होटल पर रुकने के बाद ही उन्हें पता चला कि आगे का एक पुल बाढ़ में पूरी तरह बह चुका है। वह होटल एक भारतीय का था, जिन्होंने संकट के उस समय में इन सभी दोस्तों की बहुत मदद की और उन्हें खाना खिलाया।
आंखों के सामने बहती चली गईं गाड़ियां और लाशें
नारायण बताते हैं कि चाय की दुकान पर रुकने के बाद इन दोस्तों ने वह खौफनाक मंजर देखा जिसे वे जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे उफनती त्रिशूली नदी में गाड़ियां, शव और तमाम घरेलू सामान पानी के तेज बहाव में बहते जा रहे थे। इस भयावह दृश्य को देखकर वे बुरी तरह डर गए थे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

