इंटर की परीक्षा पास करने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का सपना भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का होता है। इसमें सफल होने वाले अफसर सेवा में पूरे मनोयोग से जुटते भी हैं और एक मुकाम भी हासिल करते हैं। ऐसे ही अफसरों में एक दिव्या मित्तल ने 13 वर्ष की सेवा के बाद त्यागपत्र दिया है।
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई
मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं। सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज और भी बढ़ता गया। लोग मेरी खुशी में मुझसे अधिक खुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोली
उन्होंने आगे लिखा कि आज आभार से आंखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध मां, जो अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचता देख कुछ नहीं बोली। बस कांपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई, पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना
इसके आगे उन्होंने लिखा कि बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। जीवन का असली सुकून उन आंखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार जमीन का हक मिला। जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
फैसले पर रहती थीं अटल
मीरजापुर में जिलाधिकारी रहीं दिव्या मित्तल विकास कार्यों को लेकर काफी चर्चित थीं। राजनेताओं की बातों को दरकिनार कर अपने फैसले पर अडिग रहती थीं। अडिग फैसले का ही परिणाम रहा कि आजादी के लगभग 76 साल बाद जनपद की पहाड़ी पर स्थित लहुरिया दह गांव के लोगों को पहली बार पाइप लाइन से पानी की आपूर्ति मिली। इसके पहले तक गांव के 1,200 लोग पानी के लिए पास के झरने पर निर्भर थे, जो गर्मियों में सूख जाता था। मीरजापुर के बाद दिव्या मित्तल को बस्ती के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी मिली। मीरजापुर में डीएम के पद पर रहने के दौरान विकास को लेकर काफी सख्त थीं। अधिकारियों को फटकार लगाती रहती थीं। लोगों की मदद करने को लेकर भी वह खूब सुर्खियों में रहीं। दिव्या मित्तल की विदाई पर झूले पर बैठाकर फूलों की बारिश की गई। लोगों का कहना है कि ऐसी विदाई कुछ ही लोगों को नसीब होती है तो वहीं कुछ का कहना है कि ऐसे अधिकारियों को देश को जरूरत हैं, जहां भी रहेंगी, लोगों का भला होगा।
हरियाणा के रेवाड़ी की दिव्या का दिल्ली में हुआ जन्म
दिव्या मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी की निवासी हैं, लेकिन उनका जन्म दिल्ली में ही हुआ। उनकी पढ़ाई भी दिल्ली में ही हुई। 10वीं और 12वीं करने के बाद दिल्ली में ही बीटेक किया। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए किया। इसके बाद उनका विवाह हो गया। उनकी और पति गगनदीप सिंह की लंदन में बहुत अच्छे पैकेज पर नौकरी भी लग गई थी, लेकिन देश प्रेम इतना वह वहां ज्यादा दिन तक नहीं रह पाईं। पति-पत्नी ने इस्तीफा देकर लंदन से वापस लौटने का फैसला किया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

