सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ की संपत्ति पर फिर घमासान, प्रतिमा देवी कोर्ट में बोलीं- मुझे न वसीयत मिली, न नोटिस
सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार को नया मोड़ आ गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी पहली बार अपनी बेटी शिवांगी और दामाद के साथ जिला न्यायालय पहुंचीं। करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में मौजूद रहीं प्रतिमा देवी ने न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्हें न तो वसीयत की जानकारी दी गई और न ही जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
नेपाल के पते पर नोटिस भेजने पर भी आपत्ति
प्रतिमा देवी ने अदालत में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मामले से जुड़े नोटिस कभी प्राप्त नहीं हुए। उनके मुताबिक नोटिस नेपालगंज के ऐसे पते पर भेजे गए, जहां वह रहती ही नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से काठमांडू में रह रही हैं और उनका निवास पशुपतिनाथ मंदिर के पास है।उन्होंने अपनी तीन छोटी बहनों का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तराधिकार से जुड़े सभी पक्षों को उचित तरीके से सूचना दिए बिना संपत्ति के मामले में समझौता नहीं किया जा सकता। प्रतिमा देवी ने खुद को एक्स पार्टी बनाए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
अधिवक्ता ने मांगा समय
प्रतिमा देवी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत से विस्तृत बहस के लिए समय मांगा। न्यायालय ने आवेदन स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 तय की है। इस दिन प्रतिमा देवी की आपत्ति और संपत्ति विवाद के समाधान के लिए तैयार किए गए समझौते की वैधता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बहस होने की संभावना है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ एवं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी अधिवक्ता अदालत पहुंचे। उनके वकीलों ने भी अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा।
पहले की सहमति पर भी उठे थे सवाल
इससे पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से प्रतिमा देवी की आपत्ति का जवाब अदालत में पेश किया गया था। जवाब में कहा गया था कि यदि समझौते की प्रक्रिया के दौरान प्रतिमा देवी ने सहमति दी थी और खुद को प्रक्रिया से अलग रखा था, तो अंतिम चरण में आपत्ति दर्ज कराने का औचित्य क्या है।
पिछली सुनवाई में बंद लिफाफे में दस्तावेज पेश किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सभी पक्षों को सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और आगे से दस्तावेज बंद लिफाफे में पेश नहीं किए जाएं।
मां के हिस्से का हवाला देकर मांगा अधिकार
प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां दिवंगत पद्मावती राजे, जो राजमाता विजयाराजे सिंधिया की सबसे बड़ी पुत्री थीं, संपत्ति में हिस्सेदार थीं। ऐसे में उनके उत्तराधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी कर किया गया कोई समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता।
प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद सिंधिया राजघराने की विशाल संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर पेचीदा हो गई है। अब 10 सितंबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत उनकी आपत्तियों और समझौते की वैधता को लेकर आगे किस दिशा में बढ़ती है।
प्रतिमा देवी ने कहा कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया की वसीयत की प्रति भी उनके पास नहीं है। उन्होंने मुंबई की एक अदालत में उपलब्ध वसीयत की कॉपी का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी के माध्यम से उन्हें कुछ जानकारी मिल सकी। उन्होंने संपत्ति में बराबर का अधिकार दिए जाने की मांग भी अदालत के समक्ष रखी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

