मध्य प्रदेश के इदौर शहर में स्थित नौ प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर एक विस्तृत पड़ताल की गई। NABL) द्वारा प्रमाणित प्रयोगशाला में कराए गए पानी की जांच के नतीजों में बड़ा खुलासा हुआ है।
इन अस्पतालों के पानी में पाए गए खतरनाक जीवाणु
एमवाय अस्पताल, पीसी सेठी, चाचा नेहरू (बाल चिकित्सालय), सुपर स्पेशिएलिटी, मेंटल हॉस्पिटल तथा जिला अस्पताल के पीने के पानी में गंभीर स्तर का जैविक प्रदूषण दर्ज हुआ है। ‘संवेदना एनजीओ’ द्वारा संचालित 1000 लीटर क्षमता वाले शोधन तंत्र के बावजूद नमूनों में ई-कोलाई की
कूलरों के पास गंदगी और आपातकालीन इकाइयों में प्रणालियों का बंद होना प्रमुख समस्या पाई गई।
चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में नवजात बच्चों के इलाज वाले इस संस्थान में वाटर कूलर के आसपास अस्वच्छता पाई गई और नमूनों में संक्रमण फैला पाया गया।
वहीं, मेंटल हॉस्पिटल व जिला अस्पताल के वाटर कूलर खराब होने के कारण मटकों या लोटों के जरिए असुरक्षित पानी बांटा जा रहा है, जिससे संक्रमण का जोखिम बना हुआ है। पूरे अध्ययन के दौरान केवल एमटीएच, बाणगंगा और एमआरटीबी अस्पताल का पानी ही मानव उपभोग के अनुकूल पाया गया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

