डिशा और आंध्र प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज सभी 49 मामलों में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है।
आजाद ने 29 मई 2011 को आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद ओडिशा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह लगातार जेल में बंद थे और उनके खिलाफ विभिन्न अदालतों में मामलों की सुनवाई चल रही थी।
इसके अलावा रायगढ़ा में पॉक्सो अधिनियम के तहत भी एक मामला दर्ज था। अदालतों ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर सभी मामलों में उन्हें बरी कर दिया।
चर्चित मामले का आरोपी था आजाद
आजाद वर्ष 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार सहयोगियों की हत्या से जुड़े चर्चित मामले में भी आरोपी थे। इस मामले में भी अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया।
मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से परेशान होकर आजाद ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। 21 जुलाई 2025 को उन्होंने मामलों के शीघ्र निपटारे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश सरकारों को एक वर्ष के भीतर सभी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गजपति जिले के पारलाखेमुंडी में विशेष अदालत का गठन किया गया। इसके बाद मामलों की सुनवाई में तेजी लाई गई और सभी मामलों में फैसला सुनाया गया।
वकील पाल के अनुसार, जेल में रहते हुए आजाद ने मामलों के शीघ्र निपटारे की मांग को लेकर तीन बार भूख हड़ताल भी की थी। उनकी भूख हड़ताल क्रमशः 14, 17 और 21 दिनों तक चली थी।
अंतिम मामले में भी बरी होने के बाद मंगलवार को उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई और उन्हें झारपड़ा जेल से मुक्त कर दिया गया। उनकी रिहाई के साथ ही डेढ़ दशक से अधिक समय तक चले कानूनी संघर्ष का अंत हो गया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

