मुरादाबाद काली माता मंदिर विवाद: 15 अगस्त को सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर गद्दी कब्जाने की साजिश; चंदे में घपले का भी आरोप

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 सावन और स्वतंत्रता दिवस की गतिविधियों को लेकर पुलिस के कदम काली माता मंदिर से क्या हटे कि पूर्व महंत सज्जन गिरी सिद्धपीठ की गद्दी कब्जाने पहुंच गए। इसके लिए पूर्व महंत ने पूरी योजना बनाई, मंदिर में पुलिस की उपस्थिति को लेकर रेकी की, सीसीटीवी कैमरे तोड़े और डीवीआर भी नष्ट कर दी, जिससे कोई साक्ष्य न रहे।

इस प्रकरण में जहां पूर्व महंत की सुनियोजित साजिश सामने आई तो वहीं पुलिस कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं, कि आखिर इतने संवेदनशील प्रकरण के बावजूद मंदिर से पुलिसकर्मियों को क्यों हटाया गया। हालांकि पुलिस ने आरोपितों को जेल भेजने के बाद सोमवार को दोनों महंत विनय गिरी व महाकाल गिरी के बयान दर्ज किए हैं।

जूना अखाड़ा से जुड़े लालबाग स्थित सिद्धपीठ काली माता मंदिर की गद्दी कब्जाने की कोशिश यकायक हुआ घटनाक्रम नहीं बल्कि सुनोयिजित षड्यंत्र था। सावन और स्वतंत्रता दिवस को लेकर मंदिर पर तैनात पुलिसकर्मियों के हटते ही कब्जे की नीयत से पूर्व महंत सज्जनगिरी शनिवार को साथियों के साथ मंदिर पहुंचे थे।

मंदिर के महंत विनय गिरि के साथ मारपीट करते हुए सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे। साक्ष्य मिटाने को डीवीआर भी नष्ट कर दी थी। आरोप है कि सज्जन गिरि का भतीजा विशाल कमरे में घुस गया था और तोड़फोड़ की थी।

इस मामले में पुलिस ने पूर्व महंत सज्जन गिरि, पवन गिरि, अमर सिंह, चालक अनुराग सिंह, विशाल, अभय सिंह, आर्यन सिंह, विशाल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सात आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।

जांच में सामने आया है कि आरोपित सज्जन गिरि को इस बात की जानकारी थी कि मंदिर में हर समय तैनात रहने वाले एक दारोगा और दो कांस्टेबलों को फिलहाल सावन माह में हटा दिया गया है।

आरोपितों ने मंदिर की गद्दी को कब्जाने के लिए 15 अगस्त का दिन भी इसलिए चुना क्योंकि उस समय अधिकांश पुलिसकर्मी स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में व्यस्त होगी। जब तक पुलिस मंदिर तक पहुंचेगी तब तक मंदिर की गद्दी पर आसानी से कब्जा हो जाएगा। गद्दी कब्जाने के लिए कई दिनों से मंदिर के आसपास में पहुंचकर रेकी तक की गई थी।

प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने महंत विनय गिरि और महाकाल गिरि को चौकी बुलाकर बयान दर्ज किए। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि आरोपितों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। मंदिर पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है। सावन माह के चलते पुलिसकर्मियों की ड्यूटी दूसरे स्थान पर लगा दी गई थी। अब वहां पर 24 घंटे पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।

अयोध्या की तरह दानपात्र व चंदे की धनराशि में घपला

मंदिर से जुड़े भक्तों का आरोप है कि आम दिनों व नवरात्र के दौरान चंदा एकत्र किया जाता रहा। कोई दान व चंदा राशि का हिसाब ही नहीं रखा जाता था। आरोप है कि 2016 से सज्जन गिरि के परिवार के सदस्यों का मंदिर में प्रभाव रहा है। उनके दो भतीजों के भी मंदिर में रहने और व्यवस्थाओं में वर्चस्व था।

भक्तों का आरोप है कि सज्जन गिरि की लखनऊ स्थित बंथरा में मंदिर के दान की धनराशि से ही अच्छी खासी संपत्ति एकत्र की है। इस धन का पूरा उपयोग मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं में नहीं होता था। ज्यादातर रकम निजी उपयोग में लिया जाता था।

जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित समिति में एडीएम प्रशासन, एसडीएम और एसपी सिटी की ओर से 30 नवंबर 2025 को सौंपी गई रिपोर्ट में सामने आया कि मंदिर में अंतिम दर्ज महंत का नाम वेदांत गिरि था, जो 2015 में ब्रह्मलीन हो गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार सज्जन गिरि ने 2016 से स्वयं को महंत बताते हुए जूना अखाड़े के लेटरपैड पर महंताईनामा प्रस्तुत किया था, लेकिन वह न तो पंजीकृत था और न ही उस पर तिथि अंकित थी।

बाद में प्रशासनिक जांच के आधार पर सज्जन गिरि को महंत पद से हटाया गया और मंदिर की व्यवस्था जूना अखाड़े को दी गई। जूना अखाड़े के प्रवक्ता कंचन गिरि ने बताया कि अप्रैल में व्यवस्था संभालने के समय शिकायतें मिली थीं कि दानपात्र का नियमित हिसाब नहीं रखा जाता था।

उनके अनुसार सज्जन गिरि के कुछ समर्थकों द्वारा चंदा वसूली किए जाने और उसे मंदिर विकास के बजाय निजी उपयोग में लगाए जाने की शिकायतें भी थीं। कहा कि सज्जन गिरि को हटाए जाने के बाद अध्यक्ष नारायण गिरि महाराज ने अंतिम बार सार्वजनिक रूप से दानपात्र खुलवाया था।

उसमें प्राप्त धन का पाई-पाई का हिसाब रखा गया है। दानपात्र सीसीटीवी की निगरानी में खोला जाता है। वर्तमान महंत विनय गिरि के अनुसार अप्रैल में तीनों मंदिरों में करीब 40 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर की आय, दान और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाना है।

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