मास्साब सावधान! अब मिनट-मिनट की मिलेगी रिपोर्ट, सरकारी टैबलेट में रील्स देखी या गेम खेला तो गिरेगी गाज
जिले के परिषदीय विद्यालयों में शैक्षणिक सुधार, आनलाइन उपस्थिति और स्मार्ट क्लास संचालन के लिए शिक्षकों को दिए गए टैबलेट का अब डिजिटल आडिट कराया जाएगा। यदि टैबलेट का उपयोग मनोरंजन, सोशल मीडिया या गैर-शैक्षणिक कार्यों में पाया गया, तो संबंधित शिक्षक की जवाबदेही तय कर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, इस प्रक्रिया से खराब या तकनीकी गड़बड़ी वाले टैबलेटों की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। जिले के 2,158 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को पठन-पाठन, दीक्षा ऐप, निपुण भारत और डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने के लिए लगभग पांच हजार टैबलेट बांटे गए हैं।
शासन के निर्देशानुसार अब इन सभी डिवाइसेज की लाग फाइल, स्क्रीन टाइम और ऐप इस्तेमाल का गहन आडिट किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उपकरण केवल शैक्षणिक कार्यों में ही प्रयोग हो रहे हैं।
जांच के दौरान यदि टैबलेट में यूट्यूब, सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स या किसी अन्य निजी मनोरंजन का उपयोग पाया जाता है, तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा।
इसके अतिरिक्त, शिक्षकों को दिए गए टैबलेट में बिना अनुमति कोई अनधिकृत ऐप डाउनलोड करने या डिवाइस के सिस्टम से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करने पर भी कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
यदि जांच में गड़बड़ी फैलाने वाले या अवांछित ऐप पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षक को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस पूरी व्यवस्था का मकसद तकनीक का दुरुपयोग रोकना और प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।
खराब उपकरणों को भी कराया जाएगा ठीक
टैबलेट का मुख्य उद्देश्य दीक्षा ऐप और निपुण भारत जैसे अभियानों के तहत डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देना है। डिजिटल आडिट से जहां एक तरफ अनधिकृत उपयोग पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी तरफ खराब उपकरणों की पहचान कर उन्हें ठीक कराया जा सकेगा, जिससे स्मार्ट क्लासेज का संचालन सुचारू रूप से चलता रहे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

