गोरखपुर से सोनौली की सड़क दो जिलों को ही नहीं, दो देशों को जोड़ती है। बिना पासपोर्ट, वीजा सोनौली के रास्ते विदेश यानी नेपाल यात्रा के लिए गोरखपुर अहम पड़ाव है। पहले एक्सप्रेसवे, फोरलेन, सिक्सलेन सड़कों से होते हुए पर्यटक जब गोरखपुर से आगे बढ़ते थे तो यात्रा का अनुभव बहुत खराब रहता था।
देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण गोरखपुर-सोनौली मार्ग का ऐसा हाल यात्रियों को अखरता था। लेकिन अब बदलाव दिख रहा है। छह मार्च, 2023 को गोरखपुर से सोनौली सड़क को टू लेन से फोरलेन में बदलने का काम शुरू हुआ तो विकास को पंख लग गए। कभी जो जमीन कौड़ियों के भाव मिलती थीं, अब विदेश वाली फोरलेन के किनारे होने से करोड़ों रुपये में बिक रही थीं। एकड़ से स्क्वायर फीट का सफर बढ़ता जा रहा है।
79.54 किलोमीटर लंबी इस सड़क के कायाकल्प के लिए 2555 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ। जैसे-जैसे सड़क बनती गई, वाहनों की रफ्तार बढ़ती गई। कभी सवा तीन घंटे में दर्द के साथ पूरी होने वाली गोरखपुर से सोनाली की यात्रा अब तकरीबन डेढ़ घंटे ही लग रहे हैं। अगले साल से यह एक घंटे की हो जाएगी।
यानी दिल्ली टू नेपाल वाया गोरखपुर की यात्रा सिर्फ 11 घंटे में पूरी हो जाएगी। लखनऊ से आने में चार घंटे ही लगेंगे। दैनिक जागरण के उप मुख्य संवाददाता दुर्गेश त्रिपाठी और सीनियर फोटो जर्नलिस्ट अभिनव राजन चतुर्वेदी ने विदेश तक ले जाने वाले मार्ग पर चलकर सुविधाओं को देखा।
हमने तय किया कि जहां से गोरखपुर-सोनौली फोरलेन की शुरुआत होती है, पड़ताल के लिए यात्रा भी वहीं से शुरू करेंगे। गोरखपुर में सिविल लाइंस स्थित कार्यालय से हम निकले तो गोरखपुर-लखनऊ राजमार्ग पर सहजनवा के कालेसर जीरो प्वाइंट पहुंचे। यहां से सोनौली रोड तक पहुंचने के लिए हम जंगल कौड़िया टोल प्लाजा की ओर रवाना हो गए।
कभी जो इलाका राप्ती की बाढ़ से अभिशप्त होकर विकास से न जाने कितनी दूर था, फोरलेन ने उसे मुख्य धारा में पहुंचा दिया है। कभी 15 लाख एकड़ में बिकने वाली भूमि, अब स्क्वायर फीट में मिलती है, वह भी 15 सौ रुपये तक। खैर, शेरपुर चमराह टोल प्लाजा पार कर हम आगे बढ़े।
हम जंगल कौड़िया टोल प्लाजा से चार किलोमीटर पहले हैं और दाहिनी तरफ खाद कारखाना का ऊंचा प्रीलिंग टावर गोरखपुर की आर्थिकी को दूर से ही बताने को पर्याप्त था। सरस्वती विद्या मंदिर के सामने बड़े और व्यवस्थित गोलचक्कर ने संकेत दे दिया कि हम विदेश जाने वाली सड़क के करीब आ चुके हैं। कभी जहां दिन में कोई आदमी नहीं दिखता था, अब चाय-पकौड़ी की दुकानों पर भीड़ रहती है। जेन जी के लिए नूडल्स 24 घंटे उपलब्ध है।
एक सेकेंड का स्टाप और शुरू हो गई सोनौली की यात्रा
जंगल कौड़िया टोल प्लाजा को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने अत्याधुनिक तकनीकों से बनाया है। यहां टोल पर नजर रखने के लिए कर्मचारियों की तैनाती नहीं है। हमारी गाड़ी लेन संख्या चार पर रुकी तो किसी कर्मचारी को न देख मन में आया कि इंतजार करना तय है लेकिन एक सेकेंड में ही बैरियर उठा और गाड़ी आगे बढ़ गई।
जंगल कौड़िया से सोनौली की दूरी 79.54 किलोमीटर है। इस हिसाब से एक घंटे लगेंगे। जंगल कौड़िया में जैसे-जैसे हम आगे बढ़ रहे हैं, सड़क के दोनों तरफ का विकास साफ दिख रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

