बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर वंदे भारत चलाने की तैयारी, मुश्किल पहाड़ी रास्ते पर किया गया फील्ड ट्रायल

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दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसुरु मंडल ने बेंगलुरु-मंगलुरु मार्ग पर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए चुनौतीपूर्ण सकलेशपुर-सुब्रहमण्य रोड घाट खंड में स्वचालित आपातकालीन ब्रेक प्रणाली से युक्त वंदे भारत एक्सप्रेस का परीक्षण बुधवार को शुरू किया।

चेन्नई स्थित सवारी डिब्बा कारखाना (आईसीएफ) में विशेष रूप से तैयार की गई 20 डिब्बों वाली ट्रेन पिछले सप्ताह मैसुरु पहुंची थी। मंगलवार को मैसुरु में इसके स्थिर परीक्षण के बाद ट्रेन को उसी रात मैदानी परीक्षण के लिए सकलेशपुर रवाना किया गया।

मुश्किल रास्ते पर हुआ वंदे भारत का ट्रायल

मैसुरु मंडल के रेल प्रबंधक मुदित मित्तल ने कहा, “परीक्षण बुधवार सुबह शुरू हुआ। ट्रेन में सवार अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के कर्मचारी विभिन्न तकनीकी और परिचालन मानकों का परीक्षण कर रहे हैं।” सकलेशपुर और सुब्रहमण्य रोड के बीच स्थित यह घाट खंड बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग के सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में से एक है जहां खड़ी ढलानें, तीखे मोड़, सुरंगें और पुल हैं।

अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा परीक्षण

अधिकारी ने बताया कि यह खंड पश्चिमी घाट से होकर गुजरता है और तेज ढलानों पर ट्रेन की गति नियंत्रित रखने, ब्रेक लगाने तथा सुरक्षित परिचालन के लिहाज से लंबे समय से चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। मित्तल ने बताया, “इस घाट खंड में विभिन्न परिस्थितियों में परीक्षण अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगा। स्वचालित आपातकालीन ब्रेक प्रणाली का भी आकलन किया जा रहा है।”

क्यों खास है यह रूट

बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग सकलेशपुर-सुब्रहमण्य रोड खंड से होकर गुजरता है। इसे मूल रूप से ‘मीटर गेज’ रेल लाइन के रूप में बनाया गया था, जिसे बाद में बड़ी लाइन में परिवर्तित किया गया। यह रेल मार्ग कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और तटीय क्षेत्र मंगलुरु के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी है। इस पर यात्री रेलगाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियों का भी परिचालन होता है।

इस खंड में परीक्षण सफल रहने पर बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस के परिचालन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है जिससे दोनों शहरों के बीच तेज और सुविधाजनक रेल संपर्क उपलब्ध होने की उम्मीद है।

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