तेंदुओं की दहशत से मिलेगी राहत: हस्तिनापुर में 3 महीने बाद शुरू होगा वेस्ट यूपी का पहला बड़ा रेस्क्यू सेंटर
गन्ने के खेतों में छिपकर ग्रामीणों में दहशत पैदा करने वाले तेंदुओं के खिलाफ अब वन विभाग को एक नया ‘सुरक्षा कवच’ मिलने जा रहा है। मेरठ के हस्तिनापुर में बन रहा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर तीन महीने में शुरू हो जाएगा। इसके बाद मुरादाबाद, अमरोहा और बिजनौर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में रेस्क्यू किए जाने वाले तेंदुओं को बार-बार जंगल में छोड़ने के बजाय हस्तिनापुर में रखने की सुविधा होगी।
सेंटर में एक साथ करीब 25 तेंदुओं को रखने की क्षमता होगी। मुरादाबाद मंडल के वन संरक्षक आदर्श कुमार ने बताया कि सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है और तीन महीने में इसे चालू कर दिया जाएगा।
सेंटर शुरू होने के बाद तेंदुओं के रेस्क्यू, उपचार, निगरानी और सुरक्षित रखने की व्यवस्था पहले से बेहतर हो सकेगी। रामगंगा खादर के गांवों में इन दिनों तेंदुए के आतंक ने ग्रामीणों की नींद हराम कर दी है। लालापुर पीपलसाना और मिलकपुर सेमली समेत पूरे रामगंगा के खादर इलाके में तेंदुए की सक्रियता से ग्रामीण सहमे हुए हैं।
कभी गन्ने के खेत से निकलता तेंदुआ दिखाई देता है तो कभी खेत में काम कर रहे किसान पर हमला कर देता है। बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर किसानों के खेत जाने तक पर खतरा मंडरा रहा है।
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित रखने की रही है। प्रभावित इलाकों में 20 से अधिक पिंजरे लगाए जा चुके हैं। निगरानी और सर्च अभियान भी चलाए जा रहे हैं। हाल ही में एक तेंदुआ पिंजरे में कैद हुआ तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
पकड़ो और छोड़ो… फिर लौट आता है तेंदुआ
अभी तक रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अमानगढ़ वन क्षेत्र में छोड़ने की व्यवस्था रही है। समस्या यह है कि तेंदुए को दूसरे स्थान पर छोड़ देने से उसके मैदानी इलाकों में लौटने की आशंका बनी रहती है। इससे एक इलाके की दहशत खत्म होने से पहले दूसरे गांव में तेंदुए की आहट सुनाई देने लगती है।
अब हस्तिनापुर सेंटर इस ‘पकड़ो और छोड़ो’ व्यवस्था का विकल्प बनेगा। रेस्क्यू किए गए तेंदुओं को वहां सुरक्षित रखा जा सकेगा और उनकी निगरानी भी होगी। हस्तिनापुर रेस्क्यू सेंटर में करीब 25 तेंदुओं को रखने की क्षमता होगी। यहां सिर्फ तेंदुओं के लिए ही व्यवस्था नहीं होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर अन्य वन्यजीवों को भी रखा जा सकेगा।
घायल वन्यजीवों के उपचार, निगरानी और पुनर्वास की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इस सेंटर से वन विभाग को तेंदुओं के व्यवहार और गतिविधियों को समझने में भी मदद मिलेगी। इससे भविष्य में रेस्क्यू अभियान और मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने की रणनीति बनाने में सहूलियत होगी।
मुरादाबाद में रेस्क्यू किए गए दोनों तेंदुओं को प्रधान मुख्य वन संरक्षक से अनुमति मिलने के बाद इटावा रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। फिलहाल तेंदुओं को रखने के लिए दूसरे केंद्रों पर निर्भरता है। तीन महीने बाद हस्तिनापुर सेंटर शुरू होने पर पश्चिमी यूपी को अपना रेस्क्यू ठिकाना मिल जाएगा।
जंगलों के सिकुड़ने और गन्ने के खेतों में तेंदुओं के बढ़ते ठिकानों के बीच यह सेंटर कितनी बड़ी राहत देगा, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन फिलहाल खादर के ग्रामीणों के लिए इतना जरूर है कि तेंदुआ पकड़े जाने के बाद उसे फिर उसी इलाके के आसपास छोड़ने की मजबूरी कम होगी।
दोनों तेंदुए इटावा भेजे, हस्तिनापुर सेंटर शुरू होने का इंतजार
मुरादाबाद में पकड़े गए दोनों तेंदुओं को प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अनुमति मिलने के बाद इटावा रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। रेस्क्यू के बाद तेंदुओं को सुरक्षित रखने की फिलहाल यही व्यवस्था है। अब वन विभाग की नजर मेरठ के हस्तिनापुर में बन रहे नए रेस्क्यू सेंटर पर है। वन संरक्षक आदर्श कुमार के अनुसार सेंटर तीन महीने में चालू हो जाएगा।
इसमें करीब 25 तेंदुओं को रखने की क्षमता होगी। इसके शुरू होने के बाद मुरादाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से पकड़े जाने वाले तेंदुओं को हस्तिनापुर में रखा जा सकेगा। इससे रेस्क्यू के बाद उन्हें दूसरे वन क्षेत्रों में छोड़ने की जरूरत कम होगी और तेंदुआ प्रभावित गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

