तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा के भविष्य को लेकर तीखी राजनीतिक और सामाजिक गूंज सुनाई दी। राज्य विधानसभा ने केंद्र सरकार से नीट परीक्षा को पूरी तरह समाप्त करने का अनुरोध करते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है।
इसके साथ ही मांग की गई है कि स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश केवल कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाए। यह प्रस्ताव राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज द्वारा सदन में पेश किया गया था।
सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि नीट परीक्षा न केवल सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि यह चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राज्यों के अधिकारों पर भी सीधा अतिक्रमण करती है।
इसके अलावा, विधानसभा ने एफसीआरए संशोधन बिल, 2026 के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते हुए भी एक प्रस्ताव पास किया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष की एकजुटता बनाम भाजपा का विरोध
इस अहम प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान द्रमुक, अन्नाद्रमुक, कांग्रेस, पीएमके, वामदलों और अन्य क्षेत्रीय दलों ने एकजुट होकर इसका पुरजोर समर्थन किया। दोनों प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों – द्रमुक और अन्नाद्रमुक – का इस मुद्दे पर एक साथ आना राज्य की राजनीतिक इच्छाशक्ति को साफ दर्शाता है।
हालांकि, भाजपा के विधायक एम. भोजराजन ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि नीट परीक्षा छात्रों को एक निष्पक्ष अवसर और बेहतर भविष्य की उम्मीद प्रदान करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पोलाची के एक ही स्कूल से 10 छात्रों ने इस परीक्षा को पास किया है।
सरकार को नीट हटाने के बजाय सरकारी स्तर पर मुफ्त या बेहतर कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर देना चाहिए। विरोधस्वरूप उन्होंने मतदान में भाग लेने से इन्कार करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।
प्रस्ताव में कहा, ग्रामीण और तमिल माध्यम के छात्रों पर संकट प्रस्ताव में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि नीट की यह केंद्रीकृत व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विशेषकर तमिल माध्यम से पढ़ाई करने वाले मेधावी छात्रों के सपनों को गंभीर रूप से आहत कर रही है।
महंगे कोचिंग संस्थानों की बाढ़ और स्कूली शिक्षा की उपेक्षा ने छात्रों पर ऐसा मानसिक दबाव बना दिया है, जो किसी भी संवेदनशील समाज के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। सरकार का मानना है कि 12वीं बोर्ड के अंक ही छात्रों की असली योग्यता मापने का सबसे न्यायसंगत पैमाना हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

