पुरानी पेंशन योजना: 2004 की भर्ती में आवेदन करने वाली तकनीशियन को HC से राहत, 3 माह में दावे पर फैसला करने का आदेश

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हरियाणा की एक तकनीशियन, नीलम रानी, ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ पाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नीलम रानी के प्रतिनिधित्व पर विचार करें और तीन माह के भीतर स्पीकिंग आर्डर पारित करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नीलम रानी ओपीएस के लाभ की हकदार पाई जाती हैं, तो उन्हें यह लाभ तुरंत प्रदान किया जाए।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने नीलम रानी की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में 28 जुलाई 2023 को पारित उस आदेश को रद करने की मांग की गई थी, जिसके तहत नीलम का ओपीएस का दावा खारिज कर दिया गया था। नीलम रानी ने वर्ष 2004 में विज्ञापन संख्या छह के तहत लैबोरेटरी टेक्नीशियन के पद के लिए आवेदन किया था।

2016 को तकनीशियन के पद पर प्राप्त की नियुक्ति

उन्होंने आवेदन शुल्क क्रमशः 7 और 14 सितंबर 2004 को जमा किया था। इसके बाद 11 मई 2007 को जारी शुद्धिपत्र के माध्यम से उनके आवेदन की उम्मीदवारी सुरक्षित रखी गई। नीलम ने नए विज्ञापन के तहत 24 मई 2007 को पुनः आवेदन किया और 16 नवंबर 2016 को तकनीशियन के पद पर नियुक्ति प्राप्त की।

हरियाणा सरकार के वित्त विभाग ने 8 मई 2023 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया, जिसमें उन कर्मचारियों को ओपीएस में शामिल होने का विकल्प दिया गया, जिनकी भर्ती ऐसे पदों के लिए हुई थी, जिनका विज्ञापन 28 अक्टूबर 2005 से पहले जारी हुआ था, लेकिन उनकी नियुक्ति 1 जनवरी 2006 के बाद हुई थी।

नीलम रानी ने 6 जुलाई 2023 को इस लाभ के लिए प्रतिनिधित्व दिया, लेकिन संबंधित अधिकारी ने 28 जुलाई 2023 को यह कहते हुए उनका दावा खारिज कर दिया कि 2004 का विज्ञापन रद कर दिया गया था।

ओम प्रकाश मामले में तय हो चुका मुद्दा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि यह मुद्दा पहले ही 9 जुलाई 2026 को ओम प्रकाश मामले में तय हो चुका है, जिसमें उन कर्मचारियों को राहत दी गई थी जिनके पदों का विज्ञापन कटआफ तारीख से पहले जारी हुआ था। सुनवाई के दौरान, नीलम ने केवल यह आग्रह किया कि उनके दूसरे प्रतिनिधित्व पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लिया जाए।राज्य सरकार के अधिवक्ता ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन माह के भीतर नीलम रानी को सुनवाई का अवसर देकर उनके प्रतिनिधित्व पर फैसला किया जाए।

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