दोबारा जांच में भी बेदाग नहीं निकला मोनाड विश्वविद्यालय, अब शासन के फैसले पर टिकी मान्यता

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फर्जी डिग्री और मार्कशीट के कारोबार के आरोपों में घिरे मोनाड विश्वविद्यालय (Monad University) की मुश्किलें अब और बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रशासन की ओर से कराई गई पुन: जांच में भी यूपी एसटीएफ की जांच में सामने आए तथ्यों को सही पाया गया है।

डीएम की अध्यक्षता में हुई जांच की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब विश्वविद्यालय की मान्यता और पंजीकरण को निरस्त करने पर अंतिम फैसला शासन स्तर से होना है। मोनाड विश्वविद्यालय प्रबंधन के आग्रह पर शासन ने फर्जी डिग्री प्रकरण में दोबारा जांच के आदेश दिए थे।

उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव के निर्देश पर डीएम कविता मीना की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई। समिति में शामिल सीडीओ श्रुति शर्मा ने विश्वविद्यालय के वीसी मोहम्मद जावेद, डिप्टी रजिस्ट्रार कर्नल डीपी सिंह समेत पांच लोगों से पूछताछ कर उनका पक्ष दस्तावेजों के साथ दर्ज किया।

जांच में एसटीएफ की कार्रवाई और उसके दौरान सामने आए तथ्यों की भी पड़ताल की गई। प्रशासन की पुन: जांच में एसटीएफ की जांच के तथ्यों को सही पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। इससे पहले तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय की अध्यक्षता वाली समिति भी विश्वविद्यालय की मान्यता और पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की थी।

2019 में पहली बार उठा था फर्जी डिग्री का मामला

पिलखुवा स्थित मोनाड विश्वविद्यालय पर वर्ष 2019 में छात्रों ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार कर बेचने के आरोप लगाए थे। इसके बाद एसआइटी की जांच में प्रबंधक समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और आरोपितों को जेल भेजा गया। वर्ष 2025 में यूपी एसटीएफ ने विश्वविद्यालय में छापा मारकर फर्जी डिग्री-मार्कशीट प्रकरण में 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, सर्वर, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल डाटा बरामद किया गया था।

1421 फर्जी डिग्री-मार्कशीट बरामद होने का दावा

तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय की जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान विभिन्न पाठ्यक्रमों की 1421 तैयार फर्जी डिग्री और मार्कशीट बरामद हुई थीं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ब्लैंक मार्कशीट भी मिली थीं। एसटीएफ की जांच में उत्तर प्रदेश के साथ हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कई राज्यों में फर्जी डिग्री बेचने का मामला सामने आया था।

ईडी भी जब्त कर चुकी है 25.44 करोड़ की संपत्ति

फर्जी डिग्री रैकेट से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी कार्रवाई कर चुका है। ईडी ने आरोपियों से जुड़ी करीब 25.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की थीं। इनमें फार्महाउस, फ्लैट और वाहन शामिल बताए गए थे। जांच में विश्वविद्यालय से जुड़े संचालकों पर संसाधनों के दुरुपयोग और 1800 से अधिक छात्रों को फर्जी दस्तावेज बेचकर करीब 37 करोड़ रुपये जुटाने के आरोप सामने आए थे।

53 करोड़ के छात्रवृत्ति प्रकरण में भी ब्लैकलिस्ट

मोनाड विश्वविद्यालय की मुश्किलें सिर्फ फर्जी डिग्री प्रकरण तक सीमित नहीं हैं। करीब 53 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में समाज कल्याण विभाग के निदेशक विश्वविद्यालय को पहले ही तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर चुके हैं। यदि शासन विश्वविद्यालय की मान्यता और पंजीकरण निरस्त करने का निर्णय लेता है तो वर्तमान में पढ़ाई कर रहे छात्रों के भविष्य को लेकर भी व्यवस्था करनी होगी।

ऐसी स्थिति में राज्य सरकार विश्वविद्यालय के नियमित प्रबंधन को हटाकर कामकाज संभालने के लिए तीन सदस्यीय अंतरिम समिति गठित कर सकती है। यह समिति अंतिम बैच की पढ़ाई पूरी कराने के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। इसके बाद विश्वविद्यालय की मान्यता और पंजीकरण समाप्त करने की औपचारिक कार्रवाई की जा सकती है। संपत्तियों को लेकर भी अंतिम निर्णय शासन स्तर से ही होगा।

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