‘प्रशांत किशोर से लेंगे हर दिन के काम का हिसाब’; रामकृपाल यादव का बड़ा बयान, बोले- बांकीपुर की जनता हमारी ही रहेगी

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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर से मिली हार के बाद भाजपा ने मंथन शुरू कर दिया है। बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समीक्षा बैठक की।

करीब दो घंटे तक चली बैठक में हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई और चुनावी रणनीति की कमियों का आकलन किया गया। बैठक में पटना जिले के सभी भाजपा विधायक, संगठन के पदाधिकारी और चुनाव से जुड़े प्रमुख कार्यकर्ता शामिल हुए।

नेताओं ने बूथ प्रबंधन, संगठन की सक्रियता, मतदाताओं की नाराजगी और चुनाव प्रचार के दौरान सामने आए मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रखी। प्रदेश नेतृत्व ने सभी से स्पष्ट रूप से फीडबैक लिया कि इस सीट पर पार्टी को हार का सामना क्यों करना पड़ा।

कमियों पर हुई चर्चा

बैठक के बाद बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि बांकीपुर चुनाव में पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। उन्होंने कहा,  कि करीब 30 वर्षों से भाजपा इस सीट पर पीछे नहीं रही थी।

इस बार जो कमियां रहीं, उन्हें चिन्हित किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने अपनी बात विस्तार से रखी है और प्रदेश नेतृत्व उन सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगा।”

उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता हमेशा भाजपा के साथ रही है और आगे भी रहेगी। जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पार्टी लगातार काम करेगी।

साथ ही उन्होंने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन महीने बाद उनसे हर दिन का हिसाब पूछा जाएगा।वहीं, भाजपा विधायक डॉ. संजीव चौरसिया ने कहा कि उपचुनाव के परिणाम के बावजूद कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा है।

उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता पहले की तरह उत्साह के साथ क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे और जनता के बीच जाकर संगठन को और मजबूत करेंगे।

उपचुनाव में अक्सर आते हैं चौंकानेवाले परिणाम

भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि उपचुनावों के परिणाम अक्सर सामान्य चुनावों से अलग होते हैं। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में उपचुनाव कई बार चौंकाने वाले नतीजे देते हैं।

गौरतलब है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा था और लगातार नितिन नवीन यहां से विधायक चुने जाते रहे थे।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के कारण यह सीट खाली हुई थी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।

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