तानसेन की जान बचाने के लिए गाया गया था ‘मल्हार’, लगान के सुपरहिट गाने में भी गूंजा है ये राग

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 आपने राग मल्हार का नाम जरूर सुना होगा। बारिश के मौसम में मल्हार का खास महत्व होता है। मल्हार के गीतों के बिना सावन का महीना अधूरा माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन में मल्हार क्यों गाया जाता है?

दरअसल, मल्हार और मेघ का काफी गहरा नाता है। आइए जानें क्यों सावन के महीने में मल्हार गाया जाता है और ये इतना खास क्यों है।

क्यों गाया जाता है मल्हार?

भीषण गर्मी के बाद बारिश की बूंदे धरती की तपन को दूर करती है। बारिश की पहली फुहार लोगों के लिए राहत और उमंग लेकर आती है। इसलिए वर्षा का स्वागत करने के लिए मल्हार गाया जाता है। बारिश के मौसम में अपने प्रेमी से विरह की तड़प को बयां करने के लिए भी राग मल्हार गाया जाता है। इस राग के सुर भी बहती हवा और बारिश की बूंदों से मिलते जुलते होते हैं। बारिश की खुशी को बयां करने के लिए ये राग गाया जाता है। मल्हार राग भी कई तरह का है, जो अलग-अलग सुरों और वक्त पर गाया जाता है।

क्या है राग मल्हार की कहानी?

आमतौर पर राग मल्हार को मुगल बादशाह अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक मियां तानसेन से जोड़कर देखा जाता है। इसने जुड़ी एक कहानी है कि वे राग दीपक गाकर आस-पास के दीए जला सकते थे, लेकिन शहनशाह के दरबार के कुछ मंत्री उनसे काफी जलते थे। ऐसे में उन्होंने बादशाह से सिफारिश करके तानसेन से दीपक राग गाने के लिए आग्रह किया।

तानसेन सिर्फ संगीत के उस्ताद नहीं थे, वे काफी बुद्धिमान भी थे। दीपक राग गाते समय उनके शरीर शरीर में इतनी गर्मी पैदा हो जाएगी कि वे खुद ही उसमें जल जाएंगे। ऐसे में इस गर्मी से बचने के लिए उन्होंने अपनी बेटी को राग मल्हार गाना सिखाया। जब दरबार में तानसेन ने दीपक राग गाना शुरू किया, तो उनकी बेटी ने राग मल्हार गाया, जिससे चारों ओर काले बादल छा गए और बारिश होने लगी, जिससे तानसेन की जान बच गई। तानसेन के सिखाए इस राग को आज मियां की मल्हार के नाम से जाना जाता है।

क्यों इतना खास है राग मल्हार?

राग मल्हार लोगों को वर्षा ऋतु के करीब महसूस करवाने के लिए गाया जाता है। इसमें बारिश की बूंदों, बादल की गड़गड़ाहट, बिजली की आवाज और आस-पास फैली हरियाली को बयां किया जाता है। सावन में गाए जाने वाले कजरी, झूला गीत और सावन के कई लोकगीतों में मल्हार राग का प्रभाव देखने को मिलता है।

लोगों की खुशी के साथ-साथ सावन में प्रेमी-प्रेमिकाओं के विरह को बयां करने के लिए भी ये राग गाया जाता है। राग मेघ, राग मियां की मल्हार, राग देश, राग गौड़ मल्हार और राग अमृतवर्षिनी बारिश के अलग-अलग वक्त, जैसे बारिश के पहले आसमान में बादल घिरने, बारिश की बूंदे गिरने, बारिश में भीगने और बारिश जाने के बाद, की भावना को बयां करने के लिए इन रागों को गाए जाते हैं।

फिल्मी गानों में भी मल्हार की छाप

बॉलीवुड में भी शास्त्रीय संगीत के इस राग के इस्तेमाल करके कई एवरग्रीन गाने बनाए गए हैं। लगान फिल्म का गाना घनन घनन घन घिर आए बदरा, राग मेघ से बनाया गया है। इसी तरह फिल्म मदर इंडिया का गाना दुख भरे दिन बीते रे भैया राग मेघ पर बनाया गया है। फिल्म गुड्डी का गाना बोले रे पपीहरा राग मियां की मल्हार पर बना गाना है। हिंदी सिनेमा में ऐसे कई गाने मिल जाएंगे, जिनमें राग मल्हार की झलक मिलती है।

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