दरभंगा में झील की जमीन पर ग्रीन सिटी का सपना, अब 29 लोगों पर कार्रवाई की तलवार

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 दरभंगा में जिस जमीन पर आधुनिक ग्रीन सिटी बसाने का सपना दिखाया गया था, अब उसी परियोजना पर सवालों के बादल घिर गए हैं।

जांच में सामने आया कि जिस भूमि पर रियल एस्टेट परियोजना विकसित करने की तैयारी थी, वह बिहार सरकार की गैरमजरूआ खास झील भूमि बताई जा रही है। अब जिला प्रशासन ने इस मामले में 29 लोगों को नोटिस जारी कर कार्रवाई तेज कर दी है।

सरकारी झील भूमि पर कार्रवाई तेज

दरभंगा सदर प्रखंड के खोजकीपुर मौजे में सरकारी झील भूमि की कथित खरीद-बिक्री और दाखिल-खारिज के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

प्रशासन ने उन 29 लोगों को नोटिस जारी किया है, जिनके नाम पर पहले इस भूमि की जमाबंदी कायम की गई थी। पूरे मामले की सुनवाई भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) सदर के न्यायालय में चल रही है। नोटिस के माध्यम से संबंधित पक्षों से अपना पक्ष रखने को कहा गया है।

पहले हुई खरीद-बिक्री, फिर ग्रीन सिटी की तैयारी

जानकारी के अनुसार वर्ष 2019-20 में खोजकीपुर मौजे की करीब चार बीघा 13 कट्ठा 10 धूर भूमि का पहले निजी व्यक्तियों के बीच क्रय-विक्रय हुआ। इसके बाद यह जमीन एक निजी रियल एस्टेट कंपनी को बेच दी गई। कंपनी ने यहां ग्रीन सिटी परियोजना विकसित करने की दिशा में प्रारंभिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसी दौरान भूमि की प्रकृति को लेकर सवाल उठे और मामला प्रशासन तक पहुंचा।

जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी कौशल कुमार के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में सरकारी झील भूमि के दाखिल-खारिज और जमाबंदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई। इसके बाद राजस्व प्रशासन में भी हलचल मच गई और संबंधित अभिलेखों की दोबारा जांच शुरू की गई।

राजस्व अधिकारियों पर भी हुई कार्रवाई

जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने तीन अंचलाधिकारियों समेत आधा दर्जन राजस्व कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों की भूमिका की जांच अभी भी जारी है। प्रशासन का कहना है कि यदि सुनवाई के दौरान और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डीसीएलआर कोर्ट में चल रही सुनवाई

फिलहाल यह मामला भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) सदर के न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन की अगली कार्रवाई न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी।

इस मामले पर जिले की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह केवल जमीन के स्वामित्व का विवाद नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ा अहम मामला बन गया है।

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