हिमाचल पुलिस का आदतन चिट्टा तस्करों पर शिकंजा, जमानत के बाद भी सक्रियता पर लगाया PIT-NDPS एक्ट; 174 किए काबू

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 हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ अब सबसे बड़ा हथियार प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट(पीआइटी-एनडीपीएस) 1988 बन गया है। पुलिस अब केवल चिट्टा बरामद कर आरोपित को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमानत पर छूटने के बाद दोबारा तस्करी करने वाले आदतन अपराधियों को इस कानून के तहत निवारक हिरासत में भेज रही है। अब तक 174 आदतन नशा तस्करों के खिलाफ पीआइटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा चुकी है। 700 से अधिक मामलों की जांच की गई, जिनमें से करीब 300 में वित्तीय जांच शुरू कर करीब 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को जब्त किया गया है।

क्या है पीआइटी-एनडीपीएस एक्ट

पीआइटी-एनडीपीएस एक्ट सामान्य एनडीपीएस मुकदमे से अलग है। यदि किसी आरोपित के विरुद्ध बार-बार नशा तस्करी के मामले दर्ज हों, जमानत मिलने के बाद भी वह दोबारा इसी कारोबार में सक्रिय मिले और उसके विरुद्ध पर्याप्त खुफिया व तकनीकी साक्ष्य हों तो गृह विभाग की मंजूरी के बाद उसे निवारक हिरासत में भेजा जा सकता है।

इसका उद्देश्य मुकदमे के दौरान भी तस्कर को दोबारा नेटवर्क सक्रिय करने से रोकना है। हाल के महीनों में पुलिस ने कई जिलों में आदतन तस्करों के विरुद्ध इस कानून के तहत कार्रवाई की है।

नशा तस्करों पर एटीएफ कर रही वार

नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स (एटीएफ) का गठन किया है। इसके तीन विशेष पुलिस थाने शिमला, मंडी और कांगड़ा रेंज में संचालित किए जा रहे हैं, जहां से अंतर-जिला और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर कार्रवाई की जाती है। एसटीएफ बनने के बाद पुलिस ने बड़े सप्लायरों तक पहुंचने के लिए बैकवर्ड और फारवर्ड लिंकेज माडल अपनाया है।

डिजिटल फोरेंसिक जांच और मजबूत

अब छोटे पेडलर से पूछताछ के साथ उसके मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम चैट, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा रहा है। पुलिस के अनुसार तस्करों ने भी अपने तरीके बदल दिए हैं। चिट्टा अब कुरकुरे के पैकेट, दूध के खाली पाउच और माचिस की डिब्बियों में छिपाकर सप्लाई किया जा रहा है। मोबाइल फोन काल की जगह इंस्टाग्राम और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि पुलिस को सुराग न मिल सके। इसके जवाब में तकनीकी निगरानी और डिजिटल फोरेंसिक जांच को और मजबूत किया गया है।

एंटी-चिट्टा माडल ने छोड़ा प्रभाव

आदतन तस्करों पर पीआइटी-एनडीपीएस एक्ट, अवैध संपत्तियों की जब्ती, वित्तीय और तकनीकी जांच जैसे सभी कानूनी प्रविधानों का एक साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इसी माडल को देखते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी हिमाचल के एंटी-चिट्टा माडल का विस्तृत ब्यौरा मांगा है ताकि इसे अन्य राज्यों में भी लागू करने की संभावना पर विचार किया जा सके।

केस स्टडी- आरोपित की कार और प्लाट की कुर्की

शिमला के बालूगंज पुलिस थाना में 21 अप्रैल, 2026 को मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने एनएच-पांच पर तारा देवी रोड के पास आरोपित ऋषभ कुमार को आठ ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया था। 25 अप्रैल को दूसरे आरोपित बादल उर्फ तितला को भी धारा 29 के तहत दबोचा गया। पुलिस ने जब ऋषभ के पैसों के स्रोत खंगाले तो पता चला कि उसने नशा बेचकर शिमला जिले के भरोई में एक जमीन का प्लाट खरीदा है और एक कार ली है। जुलाई, 2026 में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसकी 23.23 लाख रुपये की इस अवैध संपत्ति को एनडीपीएस एक्ट के तहत फ्रीज कर दिया।

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