किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भारत ने अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित किया।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बैठक में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि संस्कृति संवाद, आपसी विश्वास और सतत विकास के लिए एक बेहद शक्तिशाली माध्यम है।
आपसी सहयोग को मजबूत करने पर जोर
भारत ने सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने और अपनी ‘साझा सभ्यतागत विरासत’ को सहेजने की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। उन्होंने कहा कि साझा विरासत से ही वैश्विक संबंध मजबूत होंगे।
अपने संबोधन में शेखावत ने भारत के शाश्वत सभ्यतागत लोकाचार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (दुनिया एक परिवार है) का आह्वान किया। उन्होंने इंटरनेट मीडिया एक्स पर लिखा कि भारत संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और दुनिया को एक धागे में पिरोने के इस कालजयी विचार को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
एससीओ बना बेहद प्रभावी मंच
एससीओ आर्थिक और सुरक्षा के मोर्चे पर एक बेहद प्रभावशाली मंच बन चुका है। साल 2001 में रूस, चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान द्वारा स्थापित इस संगठन में भारत और पाकिस्तान 2017 में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हुए थे। अब ईरान और बेलारूस के जुड़ने से यह और अधिक मजबूत हुआ है, जहां भारत लगातार अपनी सक्रिय और भावपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

