आज के दरवाजों में कहां वो बात! पुराने जमाने के किवाड़ों में क्यों होती थी सांकल और भारी कुंडी?

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आजकल हमारे घरों में हल्के और प्लाईवुड वाले दरवाजे देखने को मिलते हैं, लेकिन अगर कुछ दशक पीछे जाकर देखें, तो उस समय के घरों के दरवाजे आज से काफी अलग हुआ करते थे। आज के दरवाजों की तुलना में वे बनावट में काफी अलग हुआ करते थे। आइए जानें पुराने घरों के दरवाजे आज के दरवाजों से कैसे अलग हुआ करते थे।

दो पल्लों के दरवाजे

आजकल घरों में सिंगल पैनल वाले दरवाजे लगाए जाते हैं, लेकिन पुराने घरों में दो पल्ले वाले दरवाजे लगाए जाते थे। दरवाजों को इस तरीके से बनाने के पीछे कई कारण हुआ करते थे। दो पल्ले होने की वजह से ये दरवाजे चौड़े हुआ करते थे, जिससे सामान अंदर-बाहर ले जाने में आसानी होती थी। साथ ही, दो पल्ले के दरवाजे घर की प्राइवेसी बनाए रखने में भी मदद करते थे।

भारी लकड़ी का इस्तेमाल

आज के दरवाजों को बहुत हल्की लकड़ी या प्लाईवुड से बनाया जाता है, लेकिन पुराने घरों के दरवाजों को शीशम, सौगान या साल जैसी लकड़ियों से बनाया जाता था, जो काफी मजबूत होती हैं। पुराने जमाने में दरवाजों को सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया जाता था, इसलिए भारी और मजबूत लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था। इसलिए ये दरवाजों सालों तक बिना खराब हुए नए जैसे बने रहते थे।

सांकल, जंजीर और बड़ी-बड़ी कुंडियां

आज के दरवाजों में पतले हैंडल, डिजिटल लॉक, छोटी और पतली कुंडी होती है, लेकिन पुराने दरवाजों में सांकल और बड़ी-बड़ी कुंडियां लगी होती थीं। दरवाजे के ऊपरी हिस्से में लोहे या पीतल की जंजीर लटकी होती थी, जिसे कुंडे में फंसाकर भारी ताला लटकाया जाता था। ये भी घर की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाता था कि कोई चोर आसानी से दरवाजे की कुंडी तोड़कर अंदर न घुस सके। उस समय डोर बेल नहीं हुआ करते थे, इसलिए दरवाजे पर भारी छल्ले लगे होते थे, जिन्हें दरवाजे पर पटका जाता था, जो तेज आवाज गूंजती थी।

छोटे आकार और ऊंचे पायदान

आज के दरवाजे 7-8 फीट ऊंचे होते हैं, ताकि इंसान आसानी से निकल सके, लेकिन पुराने घरों के दरवाजे छोटे हुआ करते थे। इनकी लंबाई इतनी होती थी, कि व्यक्ति के झुककर कमरे में जाने पड़े। इसके पीछे भी कुछ कारण थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दरवाजे छोटे बनाए जाते थे, ताकि कोई भी अंदर घुसे तो झुकना पड़े और सीधा हमला न कर सके। दूसरा कारण होता था, दरवाजे की मजबूती। दरवाजों को बहुत भारी लकड़ी से बनाया जाता था। इसलिए इन्हें छोटा बनाया जाता था, ताकि ज्यादा वजन के कारण दरवाजा फ्रेम से टूटकर गिर न जाए।

खूबसूरत नक्काशी और डिजाइन

आज के दरवाजे प्लेन और लैमिनेटेड होते हैं, लेकिन पुराने जमाने में दरवाजों की लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी से फूल-पत्तियां और दूसरे डिजाइन बनाए जाते थे। राजस्थान की हवेलियों में तो दरवाजों पर बारीक बेल-बूटे और पीतल की पत्तियां जड़ी होती थीं, जो आज भी देखने में उतनी ही खूबसूरत लगती हैं।

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