गुरुग्राम सेक्टर 42 में सरकारी जमीन पर चल रहीं अवैध व्यावसायिक गतिविधियां, जल्द गरज सकता है बुलडोजर

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 गोल्फ कोर्स रोड स्थित सेक्टर-42 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की सरकारी जमीन पर संचालित बताई जा रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर जल्द कार्रवाई होने की संभावना है।

इस कड़ी में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के नोडल अधिकारी एवं डीटीपी आरएस बाठ ने एचएसवीपी को पत्र लिखकर दोबारा यह पुष्टि मांगी है कि जिन स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वे सरकारी जमीन पर ही हैं। एचएसवीपी से पुष्टि मिलते ही संबंधित अवैध निर्माणों और व्यावसायिक गतिविधियों पर पीला पंजा चलाया जा सकता है।

रेस्टोरेशन के आदेश भी पारित किए जा चुके

जीएमडीए के डीटीपी आरएस बाठ से मिली जानकारी के अनुसार, इन अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं और रेस्टोरेशन के आदेश भी पारित किए जा चुके हैं। अब कार्रवाई से पहले केवल भूमि की स्थिति का औपचारिक पुनः सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि आगे की कार्रवाई में किसी प्रकार की कानूनी बाधा न आए।

व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से अवैध रूप से संचालित हो रही

इस मामले को लेकर हाल ही में ग्लोबल फोयर कॉन्डोमिनियम एसोसिएशन ने विभिन्न सरकारी विभागों को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि ग्लोबल फोयर माल के सामने कृष्णा होटल के पास सरकारी जमीन पर कई दुकानें, खाने-पीने के प्रतिष्ठान, मीट की दुकानें, कूरियर सेंटर, बिल्डिंग मटेरियल की दुकानें, मेडिकल स्टोर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से अवैध रूप से संचालित हो रही हैं।

अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस जारी किया गया

शिकायत के अनुसार, 9 जून 2025 को जीएमडीए द्वारा कराए गए डीजीपीएस सर्वे में खसरा नंबर 535, 536, 537, 538 और 540 में इन निर्माणों की पहचान की गई थी। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित पक्षों को 15 दिन का नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब तक जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया।

एसोसिएशन प्रतिनिधि देवेंद्र कुमार का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, सुरक्षा संबंधी समस्याएं और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है।

अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सूची भी संलग्न की गई

शिकायत के साथ जीएमडीए का पत्र, राजस्व रिकॉर्ड, डीजीपीएस सर्वे रिपोर्ट, नक्शे और कथित अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सूची भी संलग्न की गई है। शिकायत में दिसंबर 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि अवैध निर्माण हटाना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है और कार्रवाई में देरी उचित नहीं मानी जा सकती।

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