ई-20 पेट्रोल पर सरकार ने 10 बड़े सवालों के दिए जवाब, इथेनोल मिश्रण होने से माइलेज में कमी की बात मानी

1280 Shares

ई-20 (20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर देशभर में बहस तेज है। इंटरनेट मीडिया पर नई और पुरानी गाड़ियों में खराबी, माइलेज कम होने, इंजन को नुकसान, बीमा रद होने और यहां तक कि पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने जैसे कई दावे किए जा रहे हैं।

इन विवादों के बीच केंद्र सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर ई-20 पेट्रोल से जुड़े प्रमुख सवालों के जवाब दिए हैं।

विवाद क्यों शुरू हुआ?

विवाद तब बढ़ा, जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणि के बयान को लेकर यह चर्चा शुरू हुई कि ई-20 अभी “प्रयोग” के दौर में है। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय इथेनोल की आपूर्ति व्यवस्था से था, न कि ईंधन के परीक्षण से। इसके बाद पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इंटरनेट मीडिया पर वायरल दावों पर बिंदुवार सफाई जारी की।

क्या ई-20 से माइलेज कम होता है?

हां, कुछ हद तक। सरकार और आटो उद्योग पहले ही स्वीकार कर चुके हैं कि इथेनोल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होने के कारण माइलेज में हल्की कमी आ सकती है। विभिन्न परीक्षणों में यह गिरावट आमतौर पर दो से छह प्रतिशत तक पाई गई है।

क्या ई-20 से इंजन खराब होता है?

सरकार का जवाब- नहीं। मंत्रालय के अनुसार, एआरएआई, इंडियन आयल, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पेट्रोलियम और वाहन निर्माताओं के संयुक्त परीक्षणों में इंजन, धातु या प्लास्टिक के पुर्जों को कोई गंभीर नुकसान नहीं मिला। हालांकि, कुछ पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को सामान्य से पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

क्या वारंटी और बीमा खत्म हो जाएगा?

नहीं। मंत्रालय का कहना है कि ई-20 के लिए स्वीकृत या डिजाइन की गई गाड़ियों पर कंपनी की वारंटी और बीमा दोनों पहले की तरह लागू रहेंगे।

क्या ई-20 बिना परीक्षण का ईंधन है?

नहीं। सरकार का कहना है कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से इथेनोल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। भारत में भी एआरएआइ की निगरानी में हजारों किलोमीटर के परीक्षण किए गए हैं।

क्या ई-20 बनाने में बहुत ज्यादा पानी खर्च होता है?

सरकार के अनुसार, एक लीटर इथेनोल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होने का दावा गलत है। डिस्टिलरी में प्रति लीटर इथेनोल उत्पादन के लिए केवल तीन से पांच लीटर प्रसंस्कृत पानी का उपयोग होता है, जिसे दोबारा रिसाइकिल किया जाता है।

क्या पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाया जाता है?

बिलकुल नहीं। मंत्रालय के मुताबिक, पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस या चीनी नहीं मिलाई जाती। फ्यूल-ग्रेड इथेनोल औद्योगिक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार पेट्रोल में मिलाया जाता है।

क्या ई-20 पर चींटियां या मधुमक्खियां आती हैं?

सरकार ने इस दावे को भी भ्रामक बताया है। उसके अनुसार, फ्यूल-ग्रेड इथेनोल में चीनी नहीं होती और उसमें ऐसे रसायन (डीनेचुरेंट) मिलाए जाते हैं, जो कीड़ों को दूर रखते हैं। साथ ही, ई-20 में 80 प्रतिशत हिस्सा पेट्रोल का होता है, जिसकी गंध हावी रहती है।

क्या ई-20 से टंकी में पानी जमा हो जाता है?

नहीं। मंत्रालय का कहना है कि आधुनिक वाहनों और ईंधन वितरण प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पानी टंकी में प्रवेश न कर सके।

सरकार को इससे क्या फायदा दिखता है?

सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से 2014-15 के बाद अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत, 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों को, कच्चे तेल के आयात में बड़ी कमी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट आई है। दिसंबर 2025 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रण का लक्ष्य भी समय से पहले हासिल कर लिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *