वीबी-जीरामजी योजना आज से लागू: न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं, कम दिहाड़ी वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा फायदा

मनरेगा के बदले विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी योजना (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी पूरे देश में बुधवार से प्रभावी हो जाएगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार योजना की नई मजदूरी दरें जारी कर दी हैं।

नई व्यवस्था के तहत अब देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी। सबसे अधिक लाभ उन राज्यों को मिलेगा, जहां अब तक मजदूरी कम थी।

इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम और बंगाल प्रमुख हैं। इन राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।

दैनिक मजदूरी करीब 299 रुपये से बढ़कर 327 रुपये से अधिक हो जाएगी

नई अधिसूचना के बाद देश की औसत दैनिक मजदूरी करीब 299 रुपये से बढ़कर 327 रुपये से अधिक हो जाएगी। यानी औसतन लगभग 28 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी होगी। राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत वृद्धि दस प्रतिशत से अधिक है।

सरकार ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 300 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम आधार मजदूरी तय की है। इससे पहले कई राज्यों में मजदूरी 300 रुपये से कम थी और सबसे कम दर 241 रुपये प्रतिदिन थी। नई अधिसूचना के बाद ऐसी सभी मजदूरी दरों को बढ़ाकर कम से कम 300 रुपये कर दिया गया है। इसका लाभ 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों के लाखों ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा।

सरकार ने वीबी-जीरामजी योजना के तहत रोजगार की गारंटी भी बढ़ाकर 125 दिन कर दी है। यानी पात्र ग्रामीण परिवारों को पहले के मुकाबले 25 दिन अधिक काम मिलेगा। बढ़ी हुई मजदूरी और अतिरिक्त रोजगार का सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आमदनी पर पड़ेगा।

नई व्यवस्था की खासियत है कि सभी राज्यों को मजदूरी में समान वृद्धि नहीं दी गई है। जिन राज्यों में मजदूरी पहले से कम थी, वहां अधिक वृद्धि की गई है ताकि राज्यों के बीच लंबे समय से बना अंतर कम हो सके। यही कारण है कि उत्तर भारत के राज्यों के मजदूरों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। इससे ग्रामीणों की आय और गांवों की अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत होंगी।

जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक थी, वहां भी संशोधित दरें लागू की गई हैं। हरियाणा में नई मजदूरी 409 रुपये प्रतिदिन हो गई है, जबकि केरल में 401 रुपये और गोवा में 406 रुपये प्रतिदिन मिलेगी।

इसी तरह कर्नाटक और पंजाब में भी 360 से 409 रुपये तक प्रतिदिन मजदूरी हो जाएगी। जाहिर है कि पहले से ही अधिक मजदूरी वाले राज्यों को भी महंगाई और तय मानकों के अनुसार बढ़ोतरी का लाभ दिया गया है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई मजदूरी दरें तय करते समय महंगाई, मूल्य सूचकांक और अन्य आर्थिक मानकों को आधार बनाया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी। स्थानीय बाजारों में मांग मजबूत होगी और गांवों की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।

पुरानी मनरेगा योजना के तहत प्रमुख राज्यों में यह थी अभी मजदूरी दरें

विभिन्न राज्यों की मजदूरी दरें

राज्य मजदूरी (रुपये में)
उत्तर प्रदेश 252
उत्तराखंड 252
बिहार 255
झारखंड 255
मध्य प्रदेश 261
छत्तीसगढ़ 261
बंगाल 268

(स्रोत – ग्रामीण विकास मंत्रालय)

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