आषाढ़ मास की विश्वविख्यात रथयात्रा का काउंटडाउन ज्येष्ठ पूर्णिमा के देव स्नान महोत्सव से शुरू हो गया है। आज सोमवार को लौहनगरी जमशेदपुर के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों और इस्कॉन केंद्रों में पूरे श्रद्धाभाव के साथ यह दिव्य उत्सव मनाया जा रहा है।
वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और हरिनाम संकीर्तन के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का 108 कलशों के पवित्र जल से राजसी स्नान कराया जाएगा।
प्रकृति, आयुर्वेद और भक्ति का अद्भुत संगम
देव स्नान महोत्सव में महाप्रभु का अभिषेक केवल सादे जल से नहीं, बल्कि प्रकृति और आयुर्वेद के समन्वय से होता है। भगवान को शीतल रखने और औषधीय लाभ के लिए निम्नलिखित पवित्र सामग्रियों का उपयोग किया जाता है:
- गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु, चीनी)
- चंदन और अश्वगंधा का लेप
- डाब (नारियल) का जल और विभिन्न प्रकार के फलों के रस
महास्नान के संपन्न होने के बाद महाप्रभु को 56 प्रकार के व्यंजनों का भव्य भोग अर्पित किया जाएगा।
जमशेदपुर के प्रमुख मंदिरों का पूरा शेड्यूल
शहर के विभिन्न इलाकों में सुबह से ही अनुष्ठानों का दौर शुरू हो चुका है। कहाँ, किस समय मुख्य आयोजन होना है, इसकी सूची नीचे दी गई है:
मंदिर / स्थान समय मुख्य आकर्षण / अनुष्ठान
- इस्कॉन मंदिर, कदमा सुबह 04:30 बजे से मंगला आरती, 108 कलशों की शोभायात्रा (9 बजे) और शाही स्नान (11 बजे)। मुंबई की मंडली द्वारा कीर्तन।
- इस्कॉन, धालभूम क्लब दोपहर 03:00 बजे पंचामृत एवं सुगंधित द्रव्यों से भगवान का महास्नान।
- जगन्नाथ मंदिर, खासमहल सुबह 09:00 बजे से कलश यात्रा और दोपहर 12 बजे राजसी स्नान।
- गांधी आश्रम, न्यू बाराद्वारी सुबह 11:00 बजे गंगाजल, गुलाबजल, दूध, दही और चंदन से दिव्य अभिषेक।
- बेल्डीह कालीबाड़ी परिसर सुबह 10:00 से 12:00 जगन्नाथ मंदिर में विशेष अनुष्ठान और पूजा।
- उत्कल एसोसिएशन, साकची दोपहर 03:00 बजे तीन तीर्थों के पावन जल, अश्वगंधा और मधु से महास्नान।
अनोखी परंपरा: स्नान के बाद अस्वस्थ होंगे भगवान, 15 दिनों का अनवसर
देव स्नान महोत्सव की सबसे रोचक और मानवीय परंपरा इसके बाद शुरू होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में अत्यधिक स्नान करने के कारण भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को तेज ज्वर (बुखार) आ जाता है और वे अस्वस्थ हो जाते हैं।
- एकांतवास (अनवसर): अस्वस्थ होने के बाद भगवान को मंदिर के एक विशेष कक्ष में अनवसर (एकांतवास) के लिए ले जाया जाता है।
- दर्शन निषेध: अगले 15 दिनों तक भक्तों को महाप्रभु के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते हैं।
- औषधीय उपचार: इन 15 दिनों में मंदिर के वैद्य भगवान को विशेष काढ़ा और औषधियां अर्पित करते हैं।
- नवयौवन दर्शन और रथयात्रा: उपचार पूरा होने के बाद भगवान ‘नवयौवन स्वरूप’ में पूरी तरह स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें महाप्रभु नगर भ्रमण पर निकलकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाएंगे।
देव स्नान महोत्सव की खास बातें
- 108 कलशों के पवित्र और सुगंधित जल से होता है महाप्रभु का राजसी स्नान।
- अभिषेक में गंगाजल, पंचामृत, चंदन, अश्वगंधा, डाब का जल और फलों का रस शामिल होता है।
- स्नान के बाद महाप्रभु को 56 भोग लगाया जाता है।
- महास्नान के बाद 15 दिनों तक अनवसर रहता है, जिसमें प्रत्यक्ष दर्शन बंद रहते हैं।
- अनवसर की समाप्ति के बाद नवयौवन दर्शन होते हैं और फिर भव्य रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।


