औद्योगिक क्षेत्र मानेसर विश्वभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है लेकिन औद्योगिक क्षेत्र के अंदर की खस्ता हालत से रोजाना उद्यमियों को परेशान होना पड़ रहा है। लगातार मांग करने के बाद भी खस्ताहाल ढांचे को सुधारने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
औद्योगिक क्षेत्र मानेसर में ग्रीनबेल्ट की दशा कहीं भी ठीक नहीं है। सभी सेक्टरों में पौधे सुख चुके हैं। किसी भी पार्क की हालत ठीक नहीं है। मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में सड़कों में जगह जगह गड्ढे बने हुए हैं। सड़कों में गड्ढे होने से लगातार उद्यमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र में सभी नाले बंद हो चुके हैं। सड़कों पर गंदा पानी जमा रहता है। उद्यमियों द्वारा लगातार व्हाट्सएप के माध्यम से अधिकारियों को शिकायत की जाती रहती है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 25 साल पहले विकसित किए गए औद्योगिक क्षेत्र में बिजली के पैनल जर्जर हो चुके हैं।
इसके संबंध में कई बार मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं लेकिन जल्द कार्य करने का आश्वासन उद्यमियों को दिया था। अभी तक पूरे औद्योगिक क्षेत्र में एक भी पैनल को नहीं बदला गया है। सभी पैनल के दरवाजे टूटे हुए हैं। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सामने बनी सड़क में भी कई जगह गड्ढे बने हुए हैं।
रेहड़ी वालों का अतिक्रमण है। देश की बड़े गारमेंट्स हाउस के प्लांट भी मानेसर में बने हुए हैं। आटोमोबाइल सेक्टर की देश की बड़ी कंपनियों के प्लांट मानेसर में लगे हुए हैं। इसके साथ ही मानेसर में ही इंडिया इंस्टीट्यूट आफ कॉरपोरेट अफेयर्स बना हुआ है। एचएसआइआइडीसी के डीजीएम राजीव गोयल का कहना है कि सड़कों की मरम्मत का कार्य जारी है।
उद्यमियों की मांगे
- मानेसर तक मेट्रो पहुंचाना
- मानेसर से दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद तक बस सर्विस को बढ़ाना
- एनपीआर और एसपीआर को जल्द पूरा करना
- रिहायशी सेक्टर एक और औद्योगिक सेक्टरों के बीच कनेक्टिविटी
- मानेसर में सरकारी अस्पताल बनाने की मांग
- सुरक्षा के इंतजाम
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करना
- औद्योगिक सेक्टरों में हाकर मार्केट बनाना
- सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने
- सड़कों की मरम्मत और दोबारा बनाना
औद्योगिक क्षेत्र मानेसर विश्वभर में अपनी पहचान बना चुका है। अभी तक नहीं समय के अनुसार ढांचा तैयार कर के नहीं दिया गया है। पुराना ढांचा खस्ताहाल हो चुका है। ग्रीनबेल्ट के नाम पर खानापूर्ति की गई है। हम मानेसर की तुलना विदेशों के औद्योगिक क्षेत्रों से कर सकते हैं लेकिन आधारभूत ढांचे के कारण हम पिछड़ जाएंगे। रोजाना उद्यमियों को परेशान होना पड़ रहा है। कभी बिजली कट जाती है तो कभी नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं। इन्ही शिकायतों को लेकर कार्यालय के चक्कर काटते रहेंगे तो व्यवसाय कब करेंगे।
-प्रवीण शर्मा, उद्यमीमानेसर क्षेत्र में निवेश की बहुत संभावनाएं हैं लेकिन यहां उद्यमियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार एक तरफ तो बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी स्तर पर किसी तरह की सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। साफ सफाई को लेकर रोजाना शिकायत की जा रही है फिर भी कोई समाधान नहीं हो रहा है।
-मनोज त्यागी, महासचिव, आइएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन


