भारतीय समाज में शादी के बंधन को बेहद पवित्र और सात जन्मों का साथ माना जाता है। यह बंधन बिना किसी व्यवधान के लंबा चल सके इसके लिए होने वाले भावी जीवनशाथी के गुण दोष के लिए पारंपरिक जन्म कुंडली देखने का प्रचलन था। लेकिन बढ़ते इंटरनेट मीडिया के युग में अब कपल शादी के बंधन में बंधने से पहले एक दूसरे की इंटरनेट कुंडली की जांच पड़ताल करने पर जोर दे रहे हैं।
इन वजहों से टूटे कई रिश्ते
इंटरनेट मीडिया से उन्हें पढ़ाई लिखाई के समय से लेकर कार्यस्थल पर सहकर्मी और उनके साथ संबंधों की जानकारी, घूमने फिरने की आदत, खान पान की इच्छा के अलावा पहनावे और अन्य जानकारी मिल रही हैं। पिछले दिनों इंटरनेट मीडिया पर कुछ कपल को पुराने सहकर्मियों से नजदीकी की वजह से शादी से पहले ही रिश्ते तोड़ने पड़े हैं।
पारंपरिक शादी करने के लिए पहले जन्म कुंडली के अनुसार 36 में से कम से कम 18 गुण मिलना आवश्यक माना जाता था। मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, या भकूट दोष की स्थिति का पता लगाने के लिए वर वधु की कुंडली का मिलान कराना पुराने समय से प्रचलन में है।
इसके बाद मेडिकल रिपोर्ट की जांच का प्रचलन भी समाज में बढ़ने लगा शादी से पूर्व कपल्स एक दूसरे की मेडिकल रिपोर्ट देखने लगे। लेकिन अब ज्यादातर कपल्स एक दूसरे की इंटरनेट मीडिया की कुंडली खंगाले बिना शादी के बंधन में बंधने के तैयार नहीं हैं।
कपल एक दूसरे की आदतें, विचार और लाइफस्टाइल उनसे कितनी मेल खाती हैं ये सब जानना चाहते हैं। जेवर कोतवाली क्षेत्र के निवासी एक युवक की शादी तय हो गई थी। उसने इंटरनेट मीडिया पर जिस युवती से शादी होने वाली थी उसकी कुुंडली खंगाली तो पता चला की उसका लगाव शादी तय होने के बाद भी किसी अन्य पुरुष साथी से है, जिसके बाद शादी टूट गई।
वहीं जेवर की ही एक युवती ने शादी के बाद अपने होने वाले पति की इंटरनेट मीडिया पर कुंडली की जांच पड़ताल की तो पता चला की उसका होने वाला पति अपनी किसी पूर्व सहकर्मी के साथ लिवइन में है, जिसके बाद सात जन्म का साथ होने से पहले ही शादी को तोड़ना पड़ा।
फॉलोवर्स, लिस्ट, लाइक्स और कमेंट्स की कर रहे पड़ताल
भावी जीवनसाथी किस तरह के पोस्ट पसंद करता है और दूसरों के विचारों पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। किस तरह के इन्फ्लुएंसर्स, राजनीतिक विचारधाराओं या पेजों को फालो करते हैं। शादी के रिश्ते में आने से पहले कपल यह देखते हैं कि पार्टनर का आनलाइन व्यवहार कैसा है।
परंपरा और आधुनिकता में संतुलन
समाज में पारंपरिक कुंडली मिलान को आज भी अटूट वैवाहिक जीवन के लिए ज्योतिष विज्ञान की एक शाखा मानकर जरूरी माना जाता है, लेकिन कपल्स अंधविश्वास या पुराने दबाव में जीने के बजाय एक हाइब्रिड माडल अपना रहे हैं। वे पारिवारिक संतुष्टि के लिए पारंपरिक कुंडली भी देखते हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टनर के वास्तविक लाइफस्टाइल और डिजिटल ट्यूनिंग को देखकर ही कर रहे हैं।


