एक युवती ने अपने पति के साथ मिलकर अपनी नानी को खाने में चूहे मारने वाली दवा मिलाकर उनकी जान लेने का प्रयास किया। पानमती देवी, जो कृषि विभाग में चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी हैं, ने अपनी दो नातिनियों के साथ निवास किया। उनके पुत्र और पुत्रवधू की मृत्यु के बाद, सबसे बड़ी नतिनी और उसके पति मोनू ने 19 जून को सुनियोजित तरीके से पानमती को भोजन में चूहा मारने की दवा मिलाकर खिला दी।
भिंडी की सब्जी और रोटी खाने के बाद जब पानमती की तबीयत बिगड़ने लगी, तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। उन्होंने तुरंत अस्पताल जाने का निर्णय लिया और खुद को भर्ती कराया, जिससे उनकी जान बच सकी। अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की सूचना लोहता पुलिस को दी। पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया और जांच शुरू की।जांच में नतिनी और उसके पति की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को मुढ़ैला तिराहा से गिरफ्तार कर लिया। पानमती ने आरोप लगाया है कि नतिनी ने नौकरी के लालच में ऐसा किया है। लोहता थाना क्षेत्र के एसओ दिगंबर उपाध्याय ने बताया कि पीड़िता की हालत अब खतरे से बाहर है। उन्होंने अपने बयान में नतिनी और उसके पति के खिलाफ नौकरी पाने के लिए खाने में जहर देने का आरोप लगाया, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।
पुलिस टीम में दारोगा कौशल कुमार सिंह, विजेता कुमारी, हेड कांस्टेबल सुरेंद्र यादव, कांस्टेबल ऋषि राय और अमित कुमार शामिल रहे। यह घटना न केवल परिवार के भीतर के रिश्तों को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस प्रकार लालच इंसान को अंधा कर सकता है।
इस मामले ने समाज में एक गंभीर सवाल उठाया है कि क्या परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रति इस हद तक गिर सकते हैं। पानमती देवी की बहादुरी और समझदारी ने उन्हें इस संकट से बाहर निकाला, लेकिन यह घटना एक चेतावनी है कि हमें अपने आस-पास के लोगों पर विश्वास करते समय सतर्क रहना चाहिए।
इस प्रकार की घटनाएं समाज में रिश्तों की वास्तविकता को उजागर करती हैं और हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने करीबी लोगों पर भरोसा कर सकते हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कानून ऐसे मामलों में सख्त है।


