शेर, भेड़िया और ‘शोले’ वाले सियासी तीर: शिवसेना स्थापना दिवस पर एकनाथ शिंदे का उद्धव गुट पर बड़ा हमला

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर एक बार फिर सियासी तल्खी खुलकर सामने आई। उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे तथा शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी का स्थापना दिवस अलग-अलग कार्यक्रमों में मनाया। इस दौरान दोनों गुटों ने खुद को बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी बताया।

मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में एकनाथ शिंदे ने अपने संबोधन के दौरान विपक्षी गुट पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने खुद को ‘शेर’ बताते हुए विरोधियों की तुलना ‘भौंकने वाले कुत्तों’ से की और कहा कि उनकी पार्टी ही बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ा रही है।

शिंदे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अभी जो घटनाक्रम दिखाई दे रहे हैं, वे केवल शुरुआत हैं। उन्होंने कहा, “यह तो सिर्फ ट्रेलर है, असली फिल्म अभी बाकी है।” उनके इस बयान को महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित नए घटनाक्रमों और दल-बदल की अटकलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

अपने भाषण में शिंदे ने कहा कि कुछ लोग लगातार उनकी आलोचना करते रहते हैं, लेकिन मजबूत नेतृत्व को इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि शेर अकेला चलता है, जबकि कुत्ते झुंड बनाकर भौंकते हैं। उनके अनुसार, शिवसेना आज भी महाराष्ट्र में मजबूती से खड़ी है और जनता का समर्थन उसके साथ है।

उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की खबरों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी का नेतृत्व इतना मजबूत है तो फिर नेता और कार्यकर्ता लगातार उसे छोड़कर क्यों जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विरोधी गुट को इस पर आत्ममंथन करने की जरूरत है।

दरअसल, हाल के दिनों में ऐसी अटकलें सामने आई हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद और नेता शिंदे गुट के संपर्क में हैं। इन खबरों ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संघर्ष जारी रखने और पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित रहने की अपील की।

शिवसेना के स्थापना दिवस पर दोनों गुटों के अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि महाराष्ट्र की राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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